नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकार की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी पर अभी तक 1.4 करोड़ लोगों ने डाक्टरों से सलाह ली है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु उन दस राज्यों में शामिल हैं जहां इस सेवा का सबसे अधिक इस्तेमाल हुआ है। केंद्र सरकार की यह योजना काफी लोकप्रिय हो रही है जिसमें डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। यह दो प्रारूप ई-संजीवनीएबी-एचडब्ल्यूसी और ई-संजीवनीओपीडी के माध्यम से चल रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि ई-संजीवनीएबी-एचडब्ल्यूसी के माध्यम से जहां 85 लाख से अधिक लोगों ने डाक्टरों से सलाह ली, वहीं ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से 55,62,897 लोगों ने डाक्टरों से संपर्क किया। ई-संजीवनी का इस्तेमाल करने वाले दस प्रमुख राज्यों में आंध्र प्रदेश टाप पर रहा जबकि कर्नाटक दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्‍थान पर रहा। उत्‍तर प्रदेश और गुजरात क्रमश: चौथे और पांचवें स्‍थान पर रहे।

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक ई-संजीवनी का इस्तेमाल करने वाले दस प्रमुख राज्यों में आंध्र प्रदेश (47,28,131), कर्नाटक (25,73,609), तमिलनाडु (16,30,795), उत्तर प्रदेश (14,13,257), गुजरात (5,11,338), बिहार (4,74,959), मध्य प्रदेश (4,71,509), बंगाल (4,60,167), महाराष्ट्र (4,29,558) और उत्तराखंड (2,86,012) शामिल हैं।

जारी बयान में कहा गया है कि ई-संजीवनी समग्र रूप से जमीनी स्तर पर डाक्टरों और चिकित्‍सा विशेषज्ञों की कमी को दूर कर रही है। यही नहीं माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों पर बोझ को भी कम कर रही है। ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी (डाक्टर टू डाक्टर टेलीकंसल्टेशन सिस्टम) को स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से शहरी-ग्रामीण क्षेत्र का अंतर खत्म करने के लिए लांच किया गया है।

ई-संजीवनी ओपीडी की शुरुआत 13 अप्रैल, 2021 को की गई थी। इसका उद्देश्य सुरक्षित तरीके से मरीजों को डाक्टरों की सलाह मुहैया कराना है। बयान में कहा गया है कि आयुष्मान भारत डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अनुरूप इस डिजिटल पहलकदमी का उद्देश्य देश के डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे में लगातार सुधार करना है। समाचार एजेंसी आइएएनएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ई-संजीवनी AB-HWC एक टेलीकंसल्टेशन सिस्टम है जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में शहरी-ग्रामीण विभाजन को कम करना है।