यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 01, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आतंकी फंडिंग रोकने के लिए पाकिस्तान को अल्टीमेटम
अंतरराष्ट्रीय संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की पिछले हफ्ते पेरिस में हुई बैठक में तीन महीने का नोटिस देने का फैसला हुआ है।

नई दिल्ली, नीलू रंजन। आतंकी फंडिंग के मामले में पाकिस्तान तीन महीने के नोटिस पर है। तीन महीने के भीतर यदि पाकिस्तान ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की, तो कई तरह से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस पर लगाम लगाने के लिए बने अंतरराष्ट्रीय संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की पिछले हफ्ते पेरिस में हुई बैठक में तीन महीने का नोटिस देने का फैसला हुआ है। इस सिलसिले में भारत की ओर से पेश किये गए प्रस्ताव को अमेरिका और यूरोपीय देशों ने खुलकर समर्थन दिया।
दरअसल भारत में पिछले साल अक्टूबर में ही पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को हो रही भारी फंडिंग का मुद्दा उठाया था। भारत का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ से अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सूची में डाले गए लश्करे तैयबा, जमात उत दावा और जैश ए मोहम्मद के आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं और आतंकी हमलों के लिए फंड इकट्ठा कर रहे हैं। इसके लिए भारत ने कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किया था। भारत के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एफएटीएफ ने इसकी जांच का फैसला किया और एशिया पैसिफिक ग्रुप को इस पर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा। लेकिन एशिया पैसिफिक ग्रुप के सदस्यों को पाकिस्तान प्रभावित करने में सफल रहा है और रिपोर्ट तैयार नहीं होने दी।
भारत ने पिछले हफ्ते यह मुद्दा फिर उठाया तो पाकिस्तान की ओर से इसका तीखा विरोध हुआ। पाकिस्तान की कोशिश थी कि इस मुद्दे को तकनीकी पहलुओं में उलझा दिया जाए। लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों के भारत के प्रस्ताव पर मिले समर्थन से पाकिस्तान की मंशा सफल नहीं हो सकी। एफएटीएफ बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्पेन के वेगा सेरानो ने पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग पूरी तरह रोकने के लिए तीन महीने का नोटिस थमा दिया। तीन महीने में पाकिस्तान को यह बताना होगा कि उसने आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाया है। साथ ही उसे यह भी भरोसा देना पड़ेगा कि पाकिस्तान के भीतर किसी भी तरह से आतंकी संगठन फंड नहीं जुटा रहे हैं। यदि पाकिस्तान एफएटीएफ को संतुष्ट करने में विफल रहा तो उसे कई तरह के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों को सामना करना पड़ सकता है।
दरअसल 1989 में जी 7 देशों में एफएटीएफ की स्थापना ड्रग और हथियारों की तस्करी जैसे संगठित अपराधी गिरोहों की ओर किये जाने वाले मनी लांड्रिंग रोकने के लिए की गई थी। लेकिन 2001 में आतंकी फंडिंग को भी इसमें शामिल कर लिया गया। तब से अब तक आतंकी फंडिंग को रोकना ही इसका मुख्य काम हो गया है। 22-24 फरवरी को हुई बैठक भी पूरी तरह से आतंकी फंडिंग पर ही केंद्रीत थी। इसमें आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए कई फैसले लिये गए और सदस्य देशों को इन्हें लागू करने का निर्देश दिया गया।
