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उज्जैन से काशी-मथुरा तक, मस्जिदों को लेकर कब-कब मचा बवाल? पूरी रिपोर्ट

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:52 PM (IST)

उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर विवाद देखने को मिल रहा है। इस बीच देश के ...और पढ़ें

देश की किन-किन मस्जिदों पर विवाद?

देश की किन-किन मस्जिदों पर विवाद?

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मार्ग चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इस दौरान शहर के कंठाल मार्ग पर स्थित शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।

प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के दौरान नारेबाजी और विरोध शुरू हो गया। कुछ लोग हंगामा करने लगे। हालात बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। दोपहर करीब 12 बजे फिर पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मामले में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

ujjian shahi

देश में मस्जिद हटाने को लेकर हुआ यह पहला विवाद नहीं है, इससे पहले भी बीते कुछ वर्षों में कई बार सरकारी जमीन पर अतिक्रमण या नक्शे के विपरीत निर्माण के आरोपों के कारण मस्जिद को हटाने को लेकर बवाल देखने को मिला है। ऐसे में चलिए जानते हैं कुछ ऐसे मस्जिदों के बारे में जिसको लेकर पुलिस की कार्रवाई और अदालती लड़ाइयों का सामना करना पड़ा है।

संभल की शाही जामा मस्जिद

पश्चिमी यूपी के संभल शहर में एक ऊंचे टीले पर बनी शाही जामा मस्जिद को लेकर भी विवाद है। यहां मस्जिद के मेन गेट के सामने अधिकतर हिंदू लोग रहते हैं, जबकि इसकी पिछली दीवार के की ओर मुसलमान आबादी है। सदियों पुरानी यह मस्जिद इन दिनों विवादों के घेरे में है।

shahi masjid

संभल की शाही मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद जहां बनी हुई है, वहां कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था। इसको लेकर साल 2024 में संभल की सिविल कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया था कि मुगल शासक बाबर ने हरिहर मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी।

कोर्ट द्वारा 19 नवंबर 2024 को सर्वे का आदेश देने के बाद 24 नवंबर को बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद

यूपी के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ा एक ऐतिहासिक और कानूनी विवाद है। इस मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद की जगह पर पहले एक प्राचीन और मूल काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित था। जिसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने 1669 में इस मंदिर को तुड़वा दिया था और उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था।

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वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह भूमि वक्फ बोर्ड की है और यहां सदियों से नमाज पढ़ी जाती रही है। ज्ञानवापी मस्जिद का मामला अभी भी अदालत में लंबित है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट में परिसर में मंदिर के अवशेष होने का दावा किया गया। इसके बाद अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर में स्थित व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार मिला, जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद

मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि इसे मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को गिराकर बनाया गया था। वहां मूल रूप से श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर था।

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हिंदू समाज के अनुसार, "श्रीकृष्ण का जन्म कंस के कारागार में हुआ था और यही श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है। यह पूरा इलाका 'कटरा केशव देव' के नाम से जाना जाता है। यह मथुरा जिले की मथुरा बाज़ार सिटी में स्थित है। श्रीकृष्ण के वास्तविक जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन के हिस्से पर अवैध तरीके से मस्जिद बनाई गई है।"

कई मुकदमों में मस्जिद को हटाने या उस जमीन को वापस पाने की मांग की गई है। उनकी मांग है कि कटरा केशव देव जमीन को श्रीकृष्ण को वापस दिया जाए और मुसलमानों को वहां जाने से रोका जाए। उस जमीन पर ईदगाह मस्जिद का जो ढांचा बना है उसे हटाया जाए।"

धार भोजशाला विवाद

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को हाई कोर्ट ने 15 मई 2026 को अपने फैसले में इसे वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर मान लिया है। यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया।

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मान्यता है कि यहां मां सरस्वती का मंदिर और विद्या केंद्र था। जिसे 12वीं-13वीं शताब्दी में मंदिर को ध्वस्त कर वहां मकबरा और मस्जिद का निर्माण किया गया था।
हिंदू संगठन भोजशाला को राजा भोज कालीन इमारत बताते हुए इसे सरस्वती का मंदिर मानते हैं। जबकि मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग इसे कमल मौला मस्जिद मानते थे।

जनवरी 2003 में बसंत पंचमी के दौरान हिंदू संगठनों और प्रशासन के बीच बड़ा टकराव हुआ था। पुलिस लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शन भड़क गए और कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं थी।

 

टीले वाली मस्जिद लखनऊ

लखनऊ के पक्का पुल के नीचे से निकली गोमती नदी के ठीक बाएं साइड में एक टीले वाली मस्जिद बनी हुई है। इस मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल मूल रूप से 'लक्ष्मण टीला' (या शेषनाग टीला) था।

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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्राचीन हिंदू संरचना को बदलकर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस स्थल पर पूजा-अर्चना की अनुमति को लेकर मामला लखनऊ की अदालत में चल रहा है।