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उच्च शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजन अधिकार कानून के अमल की होगी परख, UGC ने मांगी रिपोर्ट

Published: Tue, 15 Sep 2026 10:30 PM (IST)

केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय ने उच्च शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजन अधिकार कानून के अमल की परख शुरू की है।

दिव्यांगजन अधिकार कानून के अमल की होगी परख।

दिव्यांगजन अधिकार कानून के अमल की होगी परख।

HighLights

  1. दिव्यांगजन अधिकार कानून के अमल की केंद्र सरकार कर रही परख।

  2. यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों से दाखिले, नौकरियों का ब्यौरा मांगा।

  3. कानून के तहत दिव्यांगों को 5% सीटें, 4% नौकरियों में आरक्षण।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने दस साल पहले लाए गए अपने कानून के अमल की परख शुरू कर दी है।

इस सिलसिले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछले सालों में दिए गए दाखिले व दी गई नौकरियों का ब्यौरा मांगा है। साथ ही ये पूछा है कि इनमें कितने दिव्यांगजन थे और उनका क्या प्रतिशत है। इसके बाद यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों ने जानकारी देने को कहा है।

यूजीसी ने देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को पत्र लिखकर 30 सितंबर तक इससे जुड़ा बिंदुवार पूरा ब्यौरा मुहैया कराने को कहा है।

दिव्यांगजनों के अधिकार के लिए बनाए कानून का कितना अमल?

सूत्रों की मानें तो इस ब्यौरे के सामने आने के बाद यह साफ हो पाएगा, कि दस वर्ष पूर्व दिव्यांगजनों के अधिकार के लिए बनाए कानून का कितना अमल हो रहा है। सूत्रों की मानें तो मंत्रालय ने यह पहल तब की है, जब बड़े पैमाने पर ऐसी शिकायतें मिल रही थी कि उच्च शिक्षण संस्थान उन्हें कानून में दिए गए अधिकार के बाद दाखिले और नौकरियों को देने में आनाकानी करते है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर मुहैया कराने के लिए दिव्यांगजन अधिकार कानून ( आरपीडब्लूडी एक्ट) लेकर आयी थी।

जिसमें सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में चलने वाले प्रत्येक पाठ्यक्रमों में दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत सीटें उनके लिए आरक्षित की गई थी और संस्थानों में दी जाने वाले नौकरियों में भी उनके लिए चार प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की थी। देश में अभी करीब तीन करोड़ दिव्यांगजन है।