'UCC से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मिलेगा बढ़ावा', शाह के एलान से गदगद हुई VHP
विश्व हिंदू परिषद ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा का स्वागत किया है।
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विहिप ने गृह मंत्री अमित शाह की यूसीसी घोषणा का स्वागत किया
HighLights
विहिप ने गृह मंत्री अमित शाह की यूसीसी घोषणा का स्वागत किया
यूसीसी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देगा: विहिप
विपक्षी दलों ने यूसीसी लागू करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद ने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राजग शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा का स्वागत किया।
कहा कि यह कदम देश में लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करके महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
यह महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथियों और अलगाववादियों के चंगुल से मुक्त करने में भी मदद करेगा। विहिप ने गैर-भाजपा शासित राज्यों से भी अपील की कि वे पहल करें और अपने-अपने यहां यूसीसी लागू करें।
विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक्स पर एक पोस्ट में यूसीसी को लागू करने की दिशा में कई राज्य सरकारों द्वारा अब तक की गई प्रगति का जिक्र किया।
उन्होंने लिखा-इसे पांच राज्यों में लागू किया जा चुका है और तीन राज्यों में इस पर काम चल रहा है। इस बीच, गृह मंत्री शाह का यह बयान स्वागत योग्य है कि 2029 तक राजग-शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।
एएनआइ के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने यूसीसी तैयार करने के लिए पहले ही एक समिति बना दी है। समिति अपना काम कर रही है।
जैसे ही यह अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, हम इसे जल्द लागू कर देंगे। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने पर चर्चा करने के लिए जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे।
इस बीच, द्रमुक नेता टीकेएस एलनगोवन ने अमित शाह के बयानों की आलोचना की और यूसीसी को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लाना संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। हम इसे नहीं ला सकते।
माकपा ने राजग-शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। एक जैसा नियम होने का मतलब हमेशा बराबरी नहीं होता।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
