नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। देशभर में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के मामले चौंकाने वाले हैं। उससे भी बड़ी बात यह है कि दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों की मौत की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देशभर के 2016 से 2019 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जहां 2016 में हुई कुल दुर्घटनाओं में मरने वालों में दोपहिया वाहन चालकों का प्रतिशत 29.4 था। 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 37.1 प्रतिशत हो गया।

संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2016 में जहां भारत में कुल 480,652 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें दो पहिया वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाएं 162280 थीं। 2017, 2018 और 2019 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा क्रमश: 464,910 , 467,044 और 4,49,002 था, जिनमें दोपहिया वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाएं क्रमश: 157723, 164313 और 167184 थीं। वहीं 2016 में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 150,785 व्यक्तियों की मौत हुई थी, जिसमें 44366 दोपहिया वाहन सवार थे। 2019 में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 151,113 व्यक्तियों की मौत हुई थी, जिनमें 56136 दोपहिया चालक शामिल थे।

ये कहते हैं एनसीआरबी के आंकड़े

एनसीआरबी के आंकड़ों का अगर हम विश्लेषण करें तो पाते हैं कि देश में हर घंटे 18 लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं, जबकि 48 दुर्घटनाएं हर 60 मिनट में रही हैं। एनसीआरबी के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ओवर स्पीडिंग का रोमांच मौत का सौदा बन रहा है। 2019 में कुल सड़क दुर्घटनाओं में 59.6 हादसे तेज गति से वाहन चलाने की वजह से हुए हैं। इसकी वजह से 365 दिनों में 86,241 लोगों की मौत हुई है, जबकि 2 लाख 71 हजार 581 लोग घायल हो गए।

ये कहती है सड़क दुर्घटनाओं पर आई हालिया रिपोर्ट

विश्व बैंक द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया था कि सड़क दुर्घटनाओं में हताहत होने वाले लोगों में सबसे ज्यादा भारत के होते हैं। भारत में दुनिया के सिर्फ एक फीसदी वाहन हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में दुनियाभर में होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा 11 प्रतिशत है। देश में हर घंटे 53 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और हर चार मिनट में एक मौत होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय सड़कों पर 13 लाख लोगों की मौत हुई है और इनके अलावा 50 लाख लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं के चलते 5.96 लाख करोड़ रुपये यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.14 प्रतिशत के बराबर नुकसान होता है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा हाल ही में किये गये एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं से 1,47,114 करोड़ रुपये की सामाजिक व आर्थिक क्षति होती है, जो जीडीपी के 0.77 प्रतिशत के बराबर है। मंत्रालय के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों में 76.2 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनकी उम्र 18 से 45 साल के बीच है, यानी ये लोग कामकाजी आयु वर्ग के हैं। 

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