अहमदाबाद, रायटर। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के टेलीस्कोप से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण करके भारत की दो किशोर छात्राओं ने पृथ्वी की ओर आ रहे एक क्षुद्रग्रह (एस्टरॉइड) की खोज की है। एक भारतीय अंतरिक्ष शिक्षा संस्थान ने सोमवार को यह जानकारी दी।

'स्पेस इंडिया' नामक इस संस्थान में ही वैदेही वेकारिया और राधिका लखानी नामक दोनों लड़कियां पढ़ती हैं। संस्थान ने बताया कि यह एस्टरॉइड वर्तमान में मंगल ग्रह के पास है और इसकी कक्षा (ऑर्बिट) के करीब दस लाख वर्ष के समय में पृथ्वी के पार जाने की संभावना है। वैदेही ने कहा, 'वे इस बात का इंतजार कर रही हैं कि कब उन्हें इस एस्टरॉइड के नामकरण का मौका मिलेगा। वह बड़ी होकर एक एस्ट्रोनॉट बनना चाहती है।'

स्पेस इंडिया की प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान में इस एस्टरॉइड को एचएलवी2514 के नाम से जाना जाता है। आधिकारिक तौर पर इसका नामकरण तभी किया जाएगा, जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा आधिकारिक तौर पर इसकी कक्षा की पुष्टि कर देगी।

बता दें कि 14 वर्षीय दोनों छात्राएं गुजरात के सूरत शहर की रहने वाली हैं। नासा से संबद्ध सिटीजन साइंटिस्ट ग्रुप 'इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलाबोरेशन' (आइएएससी) के निदेशक जे. पैट्रिक मिलर ने इस खोज की पुष्टि की है। स्पेस इंडिया ने आइएएससी के साथ मिलकर एक एस्टरॉइड सर्च कैंपेन का आयोजन किया था और इसी के तहत दोनों छात्राओं ने यह खोज की है।

दो दोस्तों की जोड़ी ने छह क्षुद्रगृहों की प्रारंभिक खोज की

बता दें कि पिछले दिनों स्पेस इंडिया की ओर से करवाए गए अखिल भारतीय क्षुद्रग्रह खोज अभियान में राजधानी के दो छात्रों (युगम पुरी और देवांश अग्रवाल) ने छह क्षुद्रग्रहों की प्रारंभिक खोज की। दोनों द्वारका सेक्टर-18 स्थित श्री वेंकटेश्वर इंटरनेशनल में कक्षा 10वीं के छात्र हैं। इन क्षुद्रगृहों पर नासा रिसर्च करेगा। आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के खगोल वैज्ञानिक डॉ शशिभूषण पांडे के अनुसार हमारे सौरमंडल में करोड़ों की संख्या में क्षुद्र ग्रह घूम रहे हैं। दरअसल यह मंगल व बृहस्पति ग्रह के बीच की कक्षा में रहते हैं, लेकिन कभी कभार छिटककर पृथ्वी के करीब आ जाते हैं।

Edited By: Tilak Raj

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