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रूस से तेल खरीदने वालों पर 100 प्रतिशत शुल्क का कानून बना, ट्रंप ने कर दिए हस्ताक्षर; भारत-चीन पर सबसे ज्यादा होगा असर

Published: Sat, 19 Sep 2026 08:16 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 08:19 PM (IST)

राष्ट्रपति ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026' पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे रूस व ...और पढ़ें

ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर

ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पहले सीनेट और बाद में हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पारित होने वाला लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 नाम का विधेयक अब कानूनी रूप ले चुका है। रूस व ईरान से तेल खरीदने वाले देशों जैसे भारत व चीन पर 100 फीसद तक शुल्क लगाने वाले इस विधेयक पर राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को हस्ताक्षर कर दिए। यह कानून अब लागू हो गया है।

ट्रंप सरकार के ब्यौरे के मुताबिक राष्ट्रपति को अगले 30 दिनों के भीतर रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100 फीसद तक शुल्क लगाना होगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) इस अवधि में लक्षित देशों की पहचान कर शुल्क की दर सुझाएंगे।

उक्त कानून के तहत भारतीय उत्पादों पर 100 फीसद शुल्क लगाया जाता है या नहीं, यह पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करेगा। उनके छूट देने या समय सीमा घटाने का अधिकार भी है। फिर भी संभावना है कि भारत और अमेरिका के बीच अगले दो हफ्तों में इस मुद्दे पर बात होगी।

पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका संयुक्त राष्ट्र की सालाना सम्मेलन को संबोधित करने जाएंगे। उसके बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जी-20 बैठक (30 सितंबर से एक अक्टूबर) में हिस्सा लेने के लिए वहां पहुंचेंगे। संकते हैं कि दोनों नेताओं की अमेरिकी समकक्षों से चर्चा होगी और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा सकती है।

भारत सरकार ने प्रतिनिधि सभा के फैसले के बाद ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। नई दिल्ली का रुख है कि तेल खरीद लागत और उपलब्धता पर आधारित है तथा आपूर्ति कई देशों से विविध स्रोतों के जरिए की जाती है।

भारत ने यह भी कहा कि यह मुद्दा हाल के महीनों में अमेरिकी पक्ष से उच्च स्तर पर उठाया जा चुका है और यह स्पष्ट भी किया है कि अगर ऐसा होता है तो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर संभव है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के रूख से साफ है कि अभी जबकि वैश्विक तेल आपूर्ति बहुत ही ज्यादा बाधित है, तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं तब रूस से आयातित तेल भारत की जरूरत है।

ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद माना जा रहा है कि सामान्य स्थिति में देशों को रूसी ऊर्जा खरीद घटाने या वाशिंगटन से बात करने के लिए 180 दिन मिल सकते हैं, लेकिन ट्रंप की नजर मध्यावधि चुनावों पर है। लिहाजा इसे जल्दी भी लागू किया जा सकता है।

भारत की प्रमुख थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की तरफ से शनिवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अस्थायी राहत के बदले लंबी ऊर्जा सुरक्षा और स्थायी व्यापार रियायतें नहीं देनी चाहिए।

रियायती रूसी कच्चा तेल आयात बिल घटाता है, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करता है और महंगाई थामने में मदद करता है। संस्था का तर्क है कि रूसी तेल खरीद रोकना या व्यापार समझौता कर लेना भी भारत को धारा 301 या क्षेत्रीय शुल्कों से पूरी तरह नहीं बचाएगा, इसलिए व्यावसायिक रूप से फायदेमंद रहने तक खरीद जारी रखनी चाहिए और एकतरफा रियायतों से बचना चाहिए।