नई दिल्ली, प्रेट्र। तत्काल तीन तलाक पर बने नए कानून को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019' को मंजूरी देने के एक दिन बाद केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों और मौलवियों के एक धार्मिक संगठन 'समस्त केरल जमीअतुल उलेमा' ने शीर्ष अदालत का रुख करते हुए इसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।

याचिका में दलील दी गई है कि धार्मिक पहचान के आधार पर कानून में दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे में अगर यह अनियंत्रित होता है तो यह समाज में ध्रुवीकरण और विघटन का कारण बन सकता है। अनुयायियों की संख्या के हिसाब से केरल के सबसे बड़े मुस्लिम संगठन होने का दावा करते हुए कहा गया है कि अधिनियम के पीछे की मंशा तीन तलाक खत्म करना नहीं, बल्कि मुस्लिम पतियों को सजा देना है।

याचिका में कहा गया है कि धारा-4 के तहत अगर कोई मुस्लिम पति तत्काल तीन तलाक देता है तो उसे तीन साल की अधिकतम सजा का प्रावधान किया गया है जबकि धारा-7 के तहत इस अपराध को संज्ञेय (बिना वारंट के गिरफ्तारी) और गैर जमानती बनाया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि नया कानून चूंकि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है, इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित किया जाए।

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Posted By: Arun Kumar Singh

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