नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। मेडिकल कॉलेजों को लाइसेंस देने में भ्रष्टाचार के आरोपों से जख्मी यूपीए सरकार को लोकसभा में उसकी सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर पटखनी देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारतीय चिकित्सा परिषद [एमसीआइ] संशोधन विधेयक 2012 के खिलाफ तृणमूल ने विरोध की अगुवाई की और इसके खिलाफ वोट किया। हालांकि, सपा और बसपा के समर्थन से सरकार विधेयक पारित करा ले गई। इस बीच, मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद पर पिछले तीन सालों में सदन को 15 मौकों पर गुमराह करने का आरोप जड़ा। साथ ही पार्टी ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने की तैयारी कर ली है।

विधेयक के पारित होने के बाद एमसीआइ गवर्नर बोर्ड का कार्यकाल मई 2013 तक बढ़ जाएगा। इस विधेयक पर चर्चा की शुरुआत में ही भाजपा सांसद मेनका गांधी ने सीधा आरोप लगाया कि एमसीआइ के गवर्नर बोर्ड के सदस्य करोड़ों की रिश्वत मांग रहे हैं। इससे तिलमिलाए आजाद ने उनसे कहा कि बिना सुबूत के वह इस तरह के गंभीर आरोप नहीं लगा सकती हैं। हंगामे के बाद सरकार के सामने संकट तब आया, जब बीजद के तथागत सत्पथी ने मत विभाजन मांग लिया। सरकार के फ्लोर मैनेजर पी. चिदंबरम और पवन बंसल सपा, बसपा व तृणमूल समेत विपक्षी दलों के पास समझाने गए। इसके बावजूद तृणमूल, भाजपा, जद [यू], बीजद और वामदलों ने इस विधेयक के खिलाफ वोट डाला। गनीमत रही कि सपा और बसपा को सरकार ने वोट न डालने के लिए मना लिया। इसी कारण विधेयक मत विभाजन के जरिये पारित हो गया। इसके पक्ष में 100 और विरोध में 57 मत पडे़। वाम दलों और बीजद सदस्यों ने विधेयक पारित होने के बाद सदन से वाकआउट किया। इधर, भाजपा के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने आजाद के खिलाफ विशेषाधिकार हनन लाने की पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आजाद पिछले तीन साल से दो डॉक्टरों के शिक्षण अनुभव, इस साल स्थापित मेडिकल कॉलेजों की संख्या, स्नातकोत्तर सीटों में बढ़ोतरी, शिक्षक-छात्र अनुपात, शिक्षकों की सेवानिवृत्तिआयु और प्रयोगशालाओं की संख्या सहित कई मुद्दों पर सदन को गुमराह करते आ रहे हैं। इस तरह से 15 मौकों पर आजाद ने झूठ बोला।

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