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नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्र ने खालिस्तान समर्थक संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' पर लगाए गए प्रतिबंध की समीक्षा के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया है। यह संगठन पिछले ही महीने गैरकानूनी घोषित किया गया था। प्रतिबंध लगाते समय गृह मंत्रालय ने कहा था कि संगठन का प्राथमिक उद्देश्य पंजाब में एक स्वतंत्र और संप्रभु देश की स्थापना करना है।

यह खुलेआम खालिस्तान के विचारों का समर्थन करता है और इस प्रक्रिया में भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देता है। सामान्यतया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय इस संगठन का संचालन अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन आदि देशों में विदेशी राष्ट्रीयता वाले कुछ कट्टरपंथी सिख करते हैं।

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी एक अधिसूचना के अनुसार, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून-1967 की धारा 5 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत केंद्र सरकार गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण का गठन करती है। दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीएन पटेल इसके अध्यक्ष होंगे।

उल्लेखनीय है कि इस तरह के न्यायाधिकरण का गठन गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत किया जाता है, ताकि प्रतिबंधित इकाई को अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका दिया जा सके।

बता दें कि केंद्र ने सिख फॉर जस्टिस (SFJ) पर प्रतिबंध लगा दिया था। संगठन पर अलगाववादी एजेंडे को बढ़ाए जाने का आरोप लगा था। सिख फॉर जस्टिस संगठन को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी करार दिया था। कहा गया कि न्यूयॉर्क स्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन अवैध तरीके से अपनी गतिविधियां चला रहा है जिससे पंजाब में हालात बिगड़ रहे हैं। गुरपतवंत सिंह पन्नू और परमजीत सिंह इस संगठन के प्रमुख लोग हैं जो अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। बताया गया कि ये फैसला सरकार ने कई सिख संगठनों की राय के बाद लिया।

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Posted By: Nitin Arora

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