यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पेट्रोल पंपों के जरिए काले धन को सफेद करने में जुटे ट्रांसपोर्टर
पेट्रोल पंपों पर पुराने नोट चलाने की सुविधा और टोल से छूट मिलने तथा बार-बार तिथियां बढ़ाए जाने से ट्रांसपोर्टर के हौसले बढ़ गए हैं।

संजय सिंह, नई दिल्ली। नोटबंदी के कारण दूसरे कारोबारियों को भले दिक्कत हो रही हो। लेकिन नकदी पर टिका ट्रांसपोर्ट व्यवसाय न केवल इस समस्या से आसानी से निपट रहा है, बल्कि अपनी काली कमाई को धड़ल्ले से सफेद कर रहा है। चूंकि सरकार ने पेट्रोल पंपों पर पुराने नोट चलाने की इजाजत दे रखी है। और ट्रांसपोर्टर पेट्रोल पंपों से उधार में डीजल लेते हैं, लिहाजा यह सुविधा उनके लिए वरदान साबित हुई है।
इन दिनों पूरे देश में तकरीबन 40 लाख ट्रक खड़े हुए हैं। ये 85 लाख ट्रकों के उस विशाल बेड़े का हिस्सा हैं जो परमिट पर चलते हैं। ये ट्रक अक्सर उन लघु व मझोले उद्योगों का माल ढोते हैं जिनका 75 फीसद लेनदेन नकदी में होता है। ट्रांसपोर्टरों की माने तो ये ट्रक इसलिए खड़े हैं क्योंकि उनके पास नकदी नहीं है। माल ढोने वाले हर ड्राइवर को रास्ते के खर्च के लिए पर्याप्त नकदी की जरूरत पड़ती है। सरकार ने कैश निकासी की सीमा को 10 हजार और 24 हजार पर सीमित कर दिया है।
कल से पेट्रोल पंप पर भी मिलेगा कैश, जल्द किराना स्टोर भी बांटेगे पैसे
लेकिन यह तस्वीर का एक पहलू है। दूसरा पहलू यह है कि ट्रांसपोर्टरों की रुचि माल बुक करने से ज्यादा अपनी काली कमाई को सफेद करने में है। चूंकि इनका आधे से ज्यादा लेनदेन नकदी में होता है और सरकार अब तक कैरिज बाय रोड एक्ट लागू नहीं करा सकी है, लिहाजा अधिकांश ट्रांसपोर्टर या कामन कैरियर बिना पंजीकरण के अपना धंधा चला रहे हैं। किसी रिकार्ड में न होने से सरकार को कभी इनकी असली कमाई का पता नहीं चलता।
इंडियन फाउंडेशन आफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एड ट्रेनिंग के संयोजक एसपी सिंह के मुताबिक, 'ज्यादातर ट्रांसपोर्टरों के पास 500/1000 रुपये के पुराने नोटों का अकूत जखीरा है। पेट्रोल पंपों पर पुराने नोट चलाने की सुविधा दिए जाने से इन्हें इस गैरकानूनी कमाई को ठिकाने लगाने का बढि़या मौका मिल गया है। आम तौर पर ट्रांसपोर्टरों के ट्रक पेट्रोल पंपों से उधार में डी़जल भरवाते हैं। इसका भुगतान छह महीने से लेकर साल भर बाद किया जाता है। लेकिन इन दिनों ढुलाई ठप होने के बावजूद ये पुराने से पुराना उधार एक झटके में चुका रहे हैं। इसके बावजूद उनकी कोशिश है कि सरकार उन्हें रोजाना 5 लाख रुपये नकदी निकासी की छूट दे दे। इसके लिए परिवहन मंत्रालय पर दबाव बनाया जा रहा है। दरअसल, पेट्रोल पंपों पर पुराने नोट चलाने की सुविधा और टोल से छूट मिलने तथा बार-बार तिथियां बढ़ाए जाने से उनके हौसले बढ़ गए हैं। आज भी ट्रांसपोर्टर रियायतें और बढ़ाने की मांग लेकर मंत्रालय गए थे।'
