नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। चुनावों को लोकतंत्र का पर्व कहा जाता है। जनता इस पर्व में शामिल होकर सीधे अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो उनके लिए फैसले लेते हैं। लोकतंत्र में जनता की सीधी भागीदारी मतदान के जरिए ही है। साल 2014 का आम चुनाव कई मायनों में अनोखा था। इस चुनाव में अनोखे नारे भी लगे। 16 मई 2014 को ही लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए थे। आज तीन साल बाद भाजपा की उस जीत और ब्रांड मोदी के परचम से जुड़े कुछ नारों पर एक बार फिर नजर डालें...

भाजपा के सुपरहिट नारे...

चुनाव में भाजपा ने जीत का परचम लहराया था तो सबसे पहले भाजपा के नारों के बारे में बात करें। आम चुनावों में भाजपा का एक नारा जो सबसे ज्यादा प्रचलित रहा वह था, 'अबकी बार मोदी सरकार।' बाद में इस नारे के इर्द-गिर्द कई अन्य मुद्दों को जोड़कर तत्कालीन यूपीए सरकार पर जमकर हमला बोला गया। जैसे- 'बहुत हुई देश में महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार', 'बहुत हुआ किसान पर अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार', बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अब की बार मोदी सरकार' आदि। इस नारे को सोशल मीडिया ने हाथों हाथ लिया और 'ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार, अबकी मोदी सरकार', 'अब आएगी जिंदगी में बहार, अबकी बार मोदी सरकार' जैसे कई नारे गढ़ डाले।

दूसरा नारा जो भाजपा की जीत में मील का पत्थर साबित हुआ वह था, 'अच्छे दिन आने वाले हैं।' इस नारे के साथ भी कई प्रयोग पार्टी और सोशल मीडिया के द्वारा किए गए। पार्टी ने इस नारे को आगे बढ़ाया और नारा बन गया, 'अच्छे दिन आने वाले हैं, हम मोदी जी को लाने वाले हैं।' उस समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के बाद भाजपा ने 'नई सोच, नई उम्मीद' का नारा भी दिया।

तत्कालीन यूपीए सरकार में एक के बाद एक भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए थे। देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश को भाजपा ने अपने पक्ष में भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस को उस समय एक खलनायक के रूप में देखा जा रहा था। जनता के इस नजरिए को भाजपा ने आवाज दी और 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा गढ़ दिया। भाजपा ने 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का भी नारा दिया। भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर 'हर हर मोदी, घर घर मोदी' का भी नारा दिया, हालांकि पार्टी ने तुरंत अपने समर्थकों से इसे वापस लेने को कह दिया था।

 

नहीं चल पाए कांग्रेस के नारे

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले देश में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। कांग्रेस ने अपने किले को बचाने की भरपूर कोशिश की। इसके लिए पार्टी ने आम चुनावों के दौरान कई नारे बनाए। कांग्रेस ने 'हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की' का नारा दिया। इसके अलावा कांग्रेस ने अपने पुराने नारे 'कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ' को भी फिर से दोहराया।

कांग्रेस ने आम चुनाव में अपने पुराने नारे 'आधी रोटी खाएंगे, कांग्रेस को जिताएंगे' को एक नई धार देने की कोशिश की और नारे को बदलकर 'पूरी रोटी खाएंगे, 100 दिन काम करेंगे, दवाई लेंगे और कांग्रेस को जिताएंगे' बना दिया। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने नारा दिया, 'कट्टर सोच नहीं, युवा जोश' इसके अलावा कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए 'मैं नहीं, हम' और 'कम बोला, काम बोला' जैसे नारे भी दिए। लेकिन जनता ने कांग्रेस के किसी नारे पर भरोसा नहीं किया। पार्टी को अपने राजनीतिक इतिहास में सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा।

साल 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी किसी रॉकस्टार से कम नहीं थे। उनकी कही गई हर बात मीडिया की सुर्खियों में छायी रही। उन्होंने इस दौरान कई नारे भी दिए और अपने भाषणों में ऐसे-ऐसे वन-लाइनर कहे जिन्हें आज भी खूब याद किया जाता है। आइए नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषणों की उन पंक्तियों पर एक नजर डालें...

- उनका एजेंडा मोदी है, बीजेपी का एजेंडा भारत है


- मैंने चाय बेची है, लेकिन कभी अपना देश नहीं बेचा
- इस चुनाव में कांग्रेस किसी एक राज्य में भी दो अंकों के आंकड़े को नहीं छू पाएगी
- भाजपा विरोधी ताकतों का एक ही एजेंडा है- मोदी रोको
- कांग्रेस और करप्शन जुड़वां बहनें हैं
- जो बच्चे मुश्किल से मां-पापा कह पाते हैं, वे अबकी बार मोदी सरकार कह रहे हैं। यह लोकतंत्र की शक्ति है
- शहज़ादे के लिए गरीबी पर्यटन है, मैं जीवन में चाय बेचकर उठा हूं
- जितना अधिक आप मेरे ऊपर कीचड़ फेंकेंगे, उतना अधिक कमल खिलेगा
- आप मुझे एक मजबूत सरकार दीजिए, मैं आपको एक मजबूत भारत दूंगा
- कांग्रेस में दस-नंबरी गांधी हैं, वे दस-जनपथ पर रहते हैं
- भारत रिवर्स गियर में चल रहा है
- हम एक 'स्किल्ड इंडिया' चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस ने 10 साल में एक 'स्कैम इंडिया' बना दिया है
- राहुल का भाषण लोगों के मनोरंजन के लिए अच्छा है
- जिस 'मां-बेटा' सरकार ने देश को बर्बाद कर दिया है, उसे सजा दो
- राजवंश लोकतंत्र का दुश्मन है
- किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए उसका घोषणापत्र गीता, कुरान और बाइबिल की तरह होना चाहिए
- शहजादे के घर में ऐसा भी जादूगर है जो 5 साल में 50 करोड़ बना लेता है
- अगर 1847 का स्वतंत्रता संग्राम कमल और रोटी के लिए था, तो 2014 का चुनाव कमल और मोदी के लिए है
- मैं तो इंतजार कर रहा था कि यूपी के मंत्री कहें - भैंस चुराना धर्मनिर्पेक्षता के लिए खतरा है
- कांग्रेस लोकतंत्र के लिए खतरा है, क्योंकि यह वंशवादी है
- मुझे देश के लिए मरने का अवसर नहीं मिला है, लेकिन मुझे देश के लिए जीने का अवसर मिल गया है
- मैं मज़दूर नंबर 1 हूं

ज्ञात हो कि साल 2014 में हुए आम चुनावों में भी जनता ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। नौ चरण के चुनाव में 66.38 फीसद लोगों में मतदान किया था। कुल 543 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में भाजपा को 282 सीटें मिलीं, जबकि दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटों से संतोष करना पड़ा था। तीसरे नंबर पर 37 सीटों के साथ एआईएडीएमके रही थी। यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक था। सत्तारूढ़ यूपीए और कांग्रेस को जनता ने बुरी तरह से नकार दिया और पहली बार भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था।

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Posted By: Shivam

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