नई दिल्ली। एनएसजी ने अपने 600 से अधिक कमांडो को वीवीआईपी सुरक्षा इकाई से हटा लिया है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि आतंकवादी घटनाओं का सामना करने की अपनी वास्तविक भूमिका की ओर एनएसजी लौट सके। वीवीआईपी की सुरक्षा से हटाए जाने के बाद पहली बार उनका इस्तेमाल पठानकोट हमले के दौरान किया।

यह योजना पिछले दो साल से अधिक समय से चल रही है। पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर हमले के दौरान इन ब्लैक कैट कमांडो का पहली बार इस्तेमाल किया गया।बल द्वारा नए ब्लू प्रिंट पर किए जा रहे काम के अनुसार 11वें स्पशेल रेंजर्स ग्रुप (एसआरजी) की कुल तीन टीमों में से दो टीमों को वीवीआईपी सुरक्षा ड्यूटी से हटा लिया गया है।

इन कमांडो को आतंकवादी रोधी अभियानों का दायित्व सौंपा गया है और स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी) जैसी प्राथमिक लड़ाकू यूनिटों की सहायता में लगाया गया है। एनएसजी की कमांडो टीमें पांच प्राथमिक इकाइयों के तहत गठित की गई हैं। इनमें दो एसएजी शामिल हैं, जिनमें सेना से अधिकारी और जवान लिए गए हैं।

इसके अलावा तीन एसआरजी टीमें हैं, जिनमें अर्धसैनिक बलों से कर्मी लिए गए हैं। दो एसएजी (51 और 52) में से प्रत्येक को आतंकवाद रोधी, अपहरण रोधी और बंधक बचाव अभियानों का दायित्व सौंपा गया है। एसआरजी (11, 12 और 13) को इस तरह के अभियानों के दौरान एसएजी को इस तरह के अभियानों के दौरान एसएजी को साजो सामान की मदद उपलब्ध कराने में इस्तेमाल किया गया।

इसके अलावा लंबे समय तक उच्च जोखिम वाले वीवीआईपी की सुरक्षा में प्राथमिक रूप से तैनात किया गया है। प्रत्येक एसआरजी में तीन टीमें हैं और हर टीम में 300 से अधिक कमांडो हैं। पूरी यूनिट में करीब 1,000 कमांडो शामिल हैं। एनएसजी का गठन 1984 में किया गया था।

Posted By: Gunateet Ojha

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस