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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ‘टाइम्लेस इंडिया’ पुस्तक का किया विमोचन, क्यों खास है यह किताब?

Published: Wed, 28 Oct 2026 08:48 PM (IST)

नई दिल्ली में 'टाइम्लेस इंडिया' पुस्तक का विमोचन किया गया, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण प्रयासों पर केंद्रित है।

दिल्ली में टाइमलेस इंडिया किताब का विमोचन।

दिल्ली में टाइमलेस इंडिया किताब का विमोचन।

HighLights

  1. 'टाइम्लेस इंडिया' पुस्तक का नई दिल्ली में विमोचन हुआ।

  2. यह सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर आधारित है।

  3. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पुस्तक का विमोचन किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नई दिल्ली के धरोहर भवन में आयोजित एक खास कार्यक्रम में ‘टाइम्लेस इंडिया’ पुस्तक का विमोचन किया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) की तरफ से लाई गई यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की पुरानी संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों को बचाने और संवारने के प्रयासों पर आधारित है।

किसने किया विमोचन और कौन रहा मौजूद?

बता दें कि इस पुस्तक का विमोचन भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने मुख्य भाषण दिया।

इस पुस्तक के लेखक और संपादक जाने-माने लेखक, पत्रकार तथा राज्यसभा के पूर्व सांसद तरुण विजय हैं। इसे आईजीएनसीए और 'सुभी पब्लिकेशन' द्वारा मिलकर प्रकाशित किया गया है।

पुस्तक में क्या है खास?

गौर करने वाली बात यह है कि यह पुस्तक भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा करने और हमारी सभ्यतागत जड़ों को मजबूत करने के महत्व को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से सामने रखती है।

इसमें इस बात पर गहराई से चर्चा की गई है कि कैसे पिछले कुछ वर्षों में देश की सांस्कृतिक पहचान को एक नया जीवन मिला है और ऐतिहासिक स्मृतियों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।

गौरतलब है कि कार्यक्रम की शुरुआत एएसआई के महानिदेशक वाई.एस. रावत के स्वागत भाषण से हुई। इस दौरान देश के इतिहास, कला और संस्कृति से जुड़े कई जाने-माने विद्वान, शोधकर्ता और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अंत में आईजीएनसीए के कला निधि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर के. अनिल कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।