यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
डोकलाम पर चीनी कार्रवाई उसकी विस्तारवादी नीति का प्रतिबिंब: लोबसांग सांगे
भारत और चीन के बीच डोकलाम सीमा विवाद काफी लंबा खिंच गया है। डोकलाम में 16 जून से भारत और ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जेएनएन। भारत और चीन के बीच डोकलाम में चल रहे सीमा विवाद पर पहली बार तिब्बत की निर्वासित सरकार के नेता लोबसांग सांगे ने चुप्पी तोड़ी है। उनका कहना है कि वर्तमान सीमा संकट चीन की विस्तारवादी विदेश नीति का प्रतीक है।
लोबसांग सांगे ने पिछले हफ्ते दिल्ली के हंसराज कॉलेज के छात्रों को संबोधित करते हुए डोकलाम में चल रही घुसपैठ को चीन की विस्तारवादी विदेश नीति का प्रतिबिंब बताया और मौजूदा गतिरोध में पूरी तरह से भारत सरकार की स्थिति का समर्थन किया। लोबसांग सांगे हंसराज कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने दावा किया कि चीन, भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, जैसा कि पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस और मुलायम सिंह यादव ने कहा था।
डोकलाम विवाद पर लोबसांग सांगे का ये बयान बीजिंग को परेशान कर सकता है। हाल ही में चीनी मीडिया ने पश्चिमी मीडिया पर डोकलाम विवाद पर भारत का पक्ष लेने का आरोप लगाया था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी संसद भवन में कह चुकी हैं कि डोकलाम मुद्दे पर विश्व के ज्यादातर देश उसके समर्थन में खड़े हैं। ऐसे में लोबसांग सांगे का बयान, चीनी सरकार को परेशान करने के लिए काफी है।
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच डोकलाम सीमा विवाद काफी लंबा खिंच गया है। डोकलाम में 16 जून से भारत और चीन की सेनाओं की टुकड़ी नॉन कॉम्बैटिव मोड में आमने-सामने खड़ी हैं। भारत और चीन दोनों अपनी-अपनी बात अड़े हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं। दोनों देश अपने-अपने रणनीतिक हितों की बात कर रहे हैं। भारत-चीन के बीच हुए 1962 युद्ध के बाद से यह पहला मौका जब इतने लंबे समय तक दोनों देश की सेनाएं एक-दूसरे के सामने डटी हुई हैं।
