धर्मेंद्र जोरे (मिड डे), मुंबई। आदर्श घोटाले की न्यायिक जांच करने वाले आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जेए पाटिल ने अशोक चह्वाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत पहले जब आयोग ने कांग्रेस-राकांपा सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी, तभी हो जाना चाहिए था। न्यायमूर्ति पाटिल ने पुणे से मिड डे के साथ बातचीत में यह बात कही।

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उन्होंने कहा कि उनकी रिपोर्ट में सारी बातें कही गई हैं। सरकार से इस संबंध में कार्रवाई किए जाने की उम्मीद थी। कांग्रेस सरकार के आधी रिपोर्ट स्वीकारने और अशोक चह्वाण के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाने के बारे में पूछे जाने पर न्यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि तब की सरकार अलग थी और अब की सरकार अलग है। अब की सरकार को इस मामले में जो सही लगा, उस पर कार्रवाई करने का विचार किया। चह्वाण के बदले की कार्रवाई बताने पर उन्होंने कहा कि अपने बचाव में नेता का ऐसा कहना स्वाभाविक है।

पाटिल आयोग

  • अक्टूबर 2010 में आदर्श घोटाला उजागर होने पर महाराष्ट्र सरकार ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेए पाटिल की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया। इसमें पूर्व मुख्य सचिव पी. सुब्रह्माण्यम भी शामिल थे।
  • आयोग ने 19 अप्रैल, 2013 को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।
  • मुख्य गवाह के तौर पर तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- विलासराव देशमुख, अशोक चह्वाण और सुशील कुमार शिंदे ने बयान दर्ज कराए।
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आयोग के निष्कर्ष

  • चार पूर्व मुख्यमंत्रियों- स्वर्गीय विलासराव देशमुख, अशोक चह्वाण, सुशील कुमार शिंदे और शिवाजीराव निलंगेकर और राकांपा के दो नेताओं- सुनील तटकरे और राजेश तोपे ने आर्दश सोसाइटी को राजनीतिक संरक्षण दिया।
  • अशोक चह्वाण, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बालासाहेब कुपेकर और पांच अन्य लोग सोसाइटी में फ्लैट के बदले विभिन्न अनुमतियां देने के दोषी।
  • मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव सुभाष लल्ला और सीएस संगीतराव, पूर्व शहरी विकास सचिव रामानंद तिवारी, पूर्व बीएमसी आयुक्त जयराज पाठक, मुंबई के पूर्व कलक्टर डॉ. प्रदीप व्यास और पूर्व मुख्य सचिव डीके शंकरन समेत 12 नौकरशाह फ्लैट पाने के लिए पद के दुरुपयोग के दोषी।
अन्य निष्कर्ष

  • सोसाइटी के स्वीकृत 102 सदस्यों में 25 अयोग्य। इनमें आइएफएस अधिकारी देवयानी खोबरागड़े, पूर्व शिवसेना मंत्री सुरेश प्रभु, अशोक चह्वाण की रिश्तेदार सीमा शर्मा और अन्य शामिल।
  • 22 फ्लैट बेनामी। इसलिए ये सभी अवैध।
  • जिस जमीन पर टॉवर बना वह रक्षा विभाग की नहीं।
  • प्लॉट और सोसाइटी की सदस्यता केवल कारगिल युद्धवीरों या शहीदों के परिजनों के लिए आरक्षित नहीं।

Posted By: kishor joshi