नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा अचानक से दमघोंटू हो गई। ऐसे में सांस लेना और आंखें खोलना तक मुश्किल हो गया। विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि चंद मीटर की दूरी तक दिखाई देना मुश्किल हो गया था। सुबह से लेकर दोपहर तक हवा में प्रदूषण के कणों के आंकड़े बदलते रहे। सुबह 6 बजे हल्की सी बरसात हुई उसके बाद ये सोचा जा रहा था कि प्रदूषण के कण कम हो जाएंगे मगर ऐसा हुआ नहीं। एयर क्वालिटी मानीटरिंग स्टेशनों में इन आंकड़ों में बढ़ोतरी दिखाई देने लगी। दोपहर तक नोएडा जैसे इलाके में पीएम10 का स्तर 1011 तक पहुंच गया था, कुछ ऐसे ही आंकड़ें अन्य इलाकों से भी मिले। 

गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम जैसे इलाकों में भी हालात ऐसे ही रहे। इन सभी इलाकों में एक्यूआइ का स्तर अपने खराब हालात से भी अधिक रिकार्ड किया गया। बीते एक सप्ताह से इन जगहों के हालात ऐसे ही बने हुए हैं। नोएडा प्रदूषण विभाग के रीजनल आफिसर एके सिंह ने बताया कि दीवाली के बाद से इसमें बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने से इसमें पहले से बढ़ोतरी हो ही रही थी, अभी तक इतना था कि प्रदूषण के ये आंकड़े ऊपर थे मगर रविवार  की सुबह हुई बरसात से ये कण नीचे आ गए जो मशीनों में भी दिखाई देने लगे। 

मौसम ने बिगाड़े हालात 

वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम ने ये हालात खराब किए है। जो बरसात रविवार की सुबह मात्र चंद मिनट हुई, यदि वो थोड़ी देर तक हो जाती तो आसमान एकदम से साफ नजर आता मगर बरसात कम होने की वजह से हालात खराब हो गए। प्रदूषण के जो कण अब तक जमीन से काफी ऊपर थे, अचानक से हुई थोड़ी बरसात से वो नीचे तक तो आ गए मगर जमीन पर नहीं बैठे जिसके कारण विजिबिलिटी और भी कम हो गई।

29 अक्टूबर के बाद 3 नवंबर को खराब हुए हालात 

उनका कहना है कि इन दिनों दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली तो जिम्मेदार है ही, इस पलूशन में इनका 46 फीसदी योगदान है मगर बाकी की कसर बरसात ने पूरी कर दी। यदि बरसात न होती तो ये कण ऊपर ही बने रहते, विजिबिलिटी थोड़ी कम जरूर होती मगर इतनी कम फिर भी नहीं होती। दीवाली के बाद से इनमें कुछ बढ़ोतरी हुई थी मगर फिर भी लेवल यहां तक नहीं पहुंचा था मगर 3 नवंबर को तो हालात एकदम से ही खराब हो गए।

पहले से लागू हेल्थ इमरजेंसी 

दिल्ली-एनसीआर के इलाके में वैसे तो दीवाली और उससे पहले से ही ग्रेप और हेल्थ इमरजेंसी लागू कर दी गई मगर उसके बाद भी यहां के हालात बहुत अधिक खराब हो गए।

ग्रेप लागू 

इपीसीए चेयरमैन डॉ.भूरेलाल ने प्रदूषण की समस्या पर रोक के लिए दिल्ली-एनसीआर में पहले ही ग्रेप लागू करवा दिया था जिसके तहत सभी तरह के निर्माण और प्रदूषण फैलाने वाली चीजों पर रोक लगा दी जाती है। उनके इस आदेश का सभी ने पालन भी किया। उसके बावजूद 3 नवंबर को हालात इतने अधिक खराब दिखे।

साल 2018 में नहीं था ऐसा हाल 

यदि साल 2018 से अक्टूबर और नवंबर माह की तुलना करें तो उस समय हालात इतने अधिक खराब नहीं थे। इस साल तो बहुत ही बुरा हाल हो गया है। विभाग की वैज्ञानिक डॉ.सपना श्रीवास्तव का कहना है कि इस समय हवा भी नहीं चल रही है यदि हवा चल रही होती तो भी धूल के कण दूर चले जाते मगर हवा ने भी हालात बुरे कर दिए हैं।  

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस