नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेज एसोसिएशन ने भले ही यह कह दिया हो कि जब तक किसी सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश नहीं आते तब तक दाखिला नहीं होगा, लेकिन कॉलेजों के समक्ष कई और व्यवहारिक परेशानियां भी आ रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह सभी कॉलेजों में दाखिला समिति ने कटऑफ सहित कई अन्य बिंदुओं पर विचार किया, जिसके कारण तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में छात्रों को तुरंत दाखिला नहीं दिया जा सकता। इस कारण प्रक्रिया में देरी की संभावना है।

दाखिले में देरी के कारण :

-तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में यह निर्धारित नहीं है कि किस छात्र को ऑनर्स में दाखिला देंगे और किसे प्रोग्राम में।

-प्रक्रिया में बदलाव होने पर कटआफ पर पड़ेगा सीधा असर। इसका निर्धारण फिर से करना पड़ेगा।

-डीयू के दाखिले के लिए शुरू किए गए सॉफ्टवेयर में फिर से करना होगा बदलाव।

-ओएमआर फार्म में कोई भी विकल्प कोर्स के लिए नहीं था। इसलिए प्रोग्राम और ऑनर्स में दाखिले संबंधी दिक्कतें बढ़ेंगी।

-एक बार फिर से पूरी फीस प्रणाली की समीक्षा होगी।

-अब शिक्षकों का वर्कलोड भी होगा प्रभावित।

-कई फाउंडेशन कोर्स बंद होने की भी होगी समीक्षा।

-स्पो‌र्ट्स ट्रायल कॉलेजों में शुरू हैं, लेकिन इसे पास करने वाले छात्रों को किस कोर्स में देंगे दाखिला, इस पर असमंजस है।

-बदलाव के लिए एक बार फिर से विद्वत परिषद और कार्यकारी परिषद के बीच रखा जाएगा प्रस्ताव।

-पिछले वर्ष तीन कॉमर्स के कोर्स खत्म करके बीएमस बनाया गया था उसको लेकर क्या होगी रणनीति।

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