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नई दिल्ली, जेएनएन। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 25 जुलाई 2017 को ख़त्म हो रहा है। उसके बाद 14वें राष्ट्रपति को चुना जाएगा। राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचन अप्रत्यक्ष मतदान के जरिए किया जाता है। इसमें जनता की जगह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि राष्ट्रपति को चुनते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचन मंडल या इलेक्टोरल कॉलेज करता है। इसमें संसद के दोनों सदनों तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।

दो केंद्र शासित प्रदेशों, दिल्ली और पुद्दुचेरी के विधायक भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं जिनकी अपनी विधानसभाएं हैं। राष्ट्रपति चुनाव जिस विधि से होता है उसका नाम है – आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा। राष्ट्रपति चुनाव की वर्तमान व्यवस्था 1974 से चली आ रही है और ये 2026 तक लागू रहेगी। इसमें 1971 की जनसंख्या को आधार माना गया है।

 

राष्ट्रपति चुनाव 2017

कुल वोट- 10,98,882
जीत के लिए
कुल वोट 50% + 1 वोट यानि 5,49,442\

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वोट का मूल्य

राष्ट्रपति चुनाव में अपनाई जानेवाली आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की विधि के हिसाब से प्रत्येक वोट का अपना मूल्य होता है।

सांसदों के वोट का मूल्य निश्चित है मगर विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या पर निर्भर करता है।

जैसे देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 है तो सबसे कम जनसंख्या वाले प्रदेश सिक्किम के वोट का मूल्य मात्र सात।

प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 708 है।

भारत में अभी 776 सांसद हैं। 543 लोकसभा सांसद और 233 राज्य सभा सांसद।

776 सांसदों के वोट का कुल मूल्य है – 5,49,408 (लगभग साढ़े पाँच लाख)

भारत में विधायकों की संख्या है 4120

इन सभी विधायकों का सामूहिक वोट है 5,49,474 (लगभग साढ़े पाँच लाख)

इस प्रकार राष्ट्रपति चुनाव में कुल वोट हैं – 10,98,882 (लगभग 11 लाख)

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विधनसभा चुनाव से पहले एनडीए की स्थिति

एनडीए को अपना राष्ट्रपति बनाने के लिए कुल वोट चाहिए 5,49,442
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले- 4,50,000

विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए की स्थिति

एनडीए के पास कुल वोट 5,32,000

समर्थन-

ऐसे में अगर एनडीए को बीजेडी और एआईएडीएमके का समर्थन मिल जाता है तो यह आंकड़ा पहुंच जाएगा- 6,28,195

Posted By: Rajesh Kumar

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