अंशु सिंह। कोविड-19 के खिलाफ जंग में स्टार्ट अप्स की भूमिका अहम रही है, जिन्होंने तकनीक की मदद से अनेक सॉल्युशन दिए हैं। नोएडा स्थित वेहांत टेक्नोलॉजीज के कपिल बर्डेजा एवं उनकी टीम ने भी थर्मल स्क्रीनिंग सिस्टम (कैमरा) ‘फेब्रिआई‘ डेवलप किया है, जो विभिन्न सरकारी एवं निजी प्रतिष्ठानों, स्थानों पर स्थापित किया जा चुका है...

कपिल के अनुसार, फेब्रिआई एक थर्मल स्क्रीनिंग सिस्टम है, जिससे किसी सरकारी बिल्डिंग, निजी कॉम्प्लेक्स, आइटी पार्क, होटल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, धार्मिक स्थलों आदि में प्रवेश करने वाले लोगों का तापमान लिया जा सकता है। इसके अलावा, एआइ आधारित एल्गोरिद्म से पता लगाया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति ने फेसमास्क पहना है या नहीं। यह लोगों के बीच शारीरिक दूरी की भी जानकारी देता है। अगर कुछ गड़बड़ी होती है, तो कैमरा आधारित इसके सिस्टम से एक अलार्म बज जाता है। इसके अलावा, इन्होंने ‘कोविड एनालिटिक्स’ नाम से एक प्रोडक्ट लॉन्च किया है, जो शहर का सर्विलांस कर सकता है। इस समय सेंट्रल रेलवे एवं नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे में इसे स्थापित किया गया है। देश के अलग-अलग शहरों में इसे स्थापित करने को लेकर बातचीत चल रही है। साथ ही इस सिस्टम में फेस रिकाग्‍निशन मॉड्यूल जोड़ने को लेकर भी काम चल रहा है।

देसी इनोवेशन पर रहा है जोर

कपिल ने आइआइटी दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद मैकेंजी ऐंड कंपनी एवं एवेंटिस जैसी कंपनियों के साथ सफलतापूर्वक काम किया। उसके पश्चात् उद्यमिता में कदम रखा और सहयोगियों की मदद से कई टेक्नोलॉजी स्टार्ट अप स्थापित किए। वे बताते हैं, ‘2005 में आइआइटी दिल्ली के इंक्यूबेटर में कंप्यूटर साइंसेज एवं इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के 5 प्रोफेसर्स की मदद से मैंने और अनूप जी प्रभु ने वेहांत टेक्नोलॉजीज की नींव रखी थी। उद्देश्य एक ही था, सिक्योरिटी एवं सर्विलांस के लिए देश में ही कंप्यूटर विजन एवं इमेज प्रॉसेसिंग का समाधान एवं प्रोडक्ट डेवलप करना। इसके बाद हमने ‘अंडर व्हीकल स्कैनिंग सिस्टम’ का निर्माण करना शुरू किया, जो विदेश से आयात किया जाता था।‘ इस तरह, बीते नौ वर्षों में इन्होंने भारत के अलावा 12 अन्य देशों में 800 के करीब यूनिट्स इंस्टॉल या उसकी आपूर्ति की है। कंपनी ने एआइ आधारित ऑटोमेटड नंबर प्लेट रीडिंग सिस्टम भी डेवलप किया है, जो ‘ट्रैफिकमॉन’ (ट्रैफिक इंफोर्समेंट ऐंड मैनेजमेंट सिस्टम) के नाम से जाता है। इस सिस्टम को देश के 25 शहरों में स्थापित किया जा चुका है। इसके अलावा, 2015 में इन्होंने एक्सरे बैगेज स्कैनर्स भी विकसित किए और हवाई अड्डों को उनकी आपूर्ति की।

सुरक्षित भविष्य का निर्माण है विजन

वेहांत टेक्नोलॉजीज के सीईओ कपिल बर्डेजा बताते हैं, आइआइटी दिल्ली इंक्यूबेटर ने न सिर्फ संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रयोग करने में मदद की, बल्कि संस्थापक प्रोफेसर्स से निरंतर विमर्श करते रहने के अवसर भी दिए। इससे हम अपने आइडिया को यथाशीघ्र इनोवेटिव प्रोडक्ट में डेवलप करने में कामयाब रहे। वहां के इकोसिस्टम से हमें सेल्स एवं मार्केटिंग में भी सहयोग मिला। लेकिन इस समय स्टार्ट अप्स के लिए मुश्किल दौर चल रहा है। कंपनियों का रेवेन्यू काफी हद तक प्रभावित हुआ है। कई एंटरप्रेन्योर्स ने स्थायी या अस्थायी तौर पर ऑपरेशन को रोक दिया है। लेकिन हमने तत्काल फैसला लेकर नए इनोवेशंस के जरिए कंपनियों एवं सरकारी प्रतिष्ठानों को नई स्‍थितियों का सामना करने के लिए तैयार किया। कोविड प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन से जुड़े नए प्रोडक्ट डेवलप कर हम रेवेन्यू की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा विजन है टेक्नोलॉजी के जरिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करना।

नोएडा स्थित वेहांत टेक्नोलॉजीज के कपिल बर्डेजा 

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