नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तरी भाग के मैदानी इलाकों समेत देश के कई हिस्सों में मार्च अपेक्षाकृत ठंडा रहा है। ऐसा इलाके में बारिश का दौर लंबा हो जाने की वजह से हुआ है। हालांकि दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी इलाके में इन दिनों तापमान सामान्य से ज्यादा हो गया है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, मार्च में तापमान कम रहने के बावजूद आने वाले गर्मी के महीने बीते वर्षों के इन्हीं महीनों की तुलना में ज्यादा गर्म होंगे। यह जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने दी है।

कोरोना वायरस के जारी प्रकोप के चलते तापमान बढ़ने का शिद्दत से इंतजार किया जा रहा है। तमाम लोगों का मानना है कि तापमान बढ़ने से फ्लू जैसे इस रोग का प्रभाव कम होगा। विभाग के वरिष्ठ विज्ञानी ओपी श्रीजीत ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों के मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (गड़बडि़यों) के चलते हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से पैदा होता है। इनसे पहाड़ों पर बर्फबारी बढ़ जाती है और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में वर्षा होती है।

विभाग के पूर्वानुमान केंद्र की प्रमुख सती देवी के अनुसार इस साल मार्च महीने के हर सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव बना रहा। इसके चलते हुई वर्षा और बर्फबारी से उत्तर के मैदानी भाग का तापमान अपेक्षाकृत कम रहा। मार्च के अंतिम दिनों में भी वर्षा की संभावना है। इससे मध्य भारत का तापमान नीचे गिर सकता है। वहीं समाचार एजेंसी एएनआइ पहले की रिपोर्ट के मुताबिक भी मार्च-अप्रैल-मई (MAM) में तापमान औसत से ज्यादा रहेगा। यही नहीं उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस साल सामान्‍य से ज्यादा लू चलने की आशंका है।

एएनआइ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मई के दौरान कोर हीट वेव जोन में सामान्य से ज्यादा हीटवेव की संभावना है जबकि देश के बाकी हिस्‍सों में तापमान के सामान्य बने रहने की संभावना है। यही नहीं पूर्व के अनुमानों में यह भी कहा गया है कि कोर हीट-वेव जोन यानी पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा व तटीय आंध्र प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ने का साथ-साथ लू का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक होगा।

 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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