नई दिल्ली,एएनआई।  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा है कि केवल आर्थिक विकास देश की प्रगति को नहीं दर्शाती है। मुखर्जी ने सुझाव दिया कि सकल घरेलू उत्पाद के साथ सकल घरेलू खुशियां होना भी जरूरी है।
 मुखर्जी ने कहा कि आज, समाज की उन्नति, देश की प्रगति, सकल घरेलू उत्पाद के साथ आर्थिक विकास और समग्र घरेलू खुशियां भी होनी चाहिए। हमें एक खुशियों से भरा समाज तैयार करना चाहिए।
 पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों को याद करते हुए कहा कि 1893 में विवेकानंद ने शिकागो संसद में हिंदू धर्म के बुनियादी दर्शन का प्रचार किया। उन्होंने मानवता की सेवा पर बल दिया। उन्होंने कहा मनुष्य की सेवा करना भगवान की सेवा करने जैसा है। इसे दुनिया की सभी सभ्यताओं ने स्वीकार किया।
 उन्होंने आगे कहा, पश्चिमी देशों की संस्कृति को प्रभावित करने वाले सभी देशों की सांस्कृतिक पुनर्स्थापना के लिए विविधता के प्रति सहिष्णुता, स्वीकृति, उत्सव का जश्न मनाना जरूरी है। एक संस्कृति का प्रभुत्व मानव प्रगति का उद्देश्य नहीं हो सकता है।
बता दें कि शनिवार को, मुखर्जी ने श्री कांची महास्वामी समारोह में सार्वजनिक नेतृत्व के लिए चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार प्राप्त किया था। यह आयोजन दक्षिण भारतीय शिक्षा सोसाइटी (एसआईईएस) द्वारा आयोजित किया गया था।

 

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Posted By: Jagran News Network

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