नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बागवानी फसलों को कृषि क्षेत्र के लिए महायोगदान बताते हुए कहा कि इसमें आधुनिक तकनीक की सख्त जरूरत है, जिसे किसानों तक पहुंचाना सरकार की उच्च प्राथमिकता है। देश को कुपोषण से मुक्त बनाने में फसल और सब्जियां सबसे मुफीद साबित हो सकती हैं। तोमर शुक्रवार को यहां पहली बार आयोजित जायद सीजन की तैयारी बैठक में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी को दोगुना करने और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में रबी और खरीफ के बाद पहली बार जायद व बागवानी की तैयारी बैठक का आयोजन किया गया है। रबी और खरीफ सीजन के बीच के तीन महीने की अवधि में दलहनी फसलें मूंग और उड़द की खेती के साथ तिलहनी सूरजमुखी की खेती भी होती है। इसके साथ सीजनल सब्जियों और फलों की खेती भी की जाती है। परंपरागत फसलों की खेती के साथ इन फसलों से किसानों को अतिरिक्त आमदनी होती है।

आधुनिक तकनीक से बागवानी फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने पर जोर देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि वैज्ञानिकों की इजाद को किसानों तक पहुंचाने में राज्यों की अहम भूमिका होती है। राज्यों के प्रतिनिधियों से चर्चा में उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें विशेष प्रयास करने होंगे। तोमर ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे ऐसी तकनीक लायें जिससे कम पानी और कम खाद में अत्यधिक उत्पादन हो सके। किसानों की आमदनी को बढ़ाने का यह सबसे आसान तरीका है।

जायद सीजन के दौरान आमतौर पर बरसात नहीं होती है। इस दौरान फलदार पेड़ आम, लीची में सेब फूल आने लगते हैं, जबकि अंगूर और अन्य फसलों की तैयारियां तेज हो जाती है। इसी मौसम की सीजनल फल खरबूजा, तरबूज, ककड़ी और अन्य फसलें लगाई जाती है, जो बहुत कम समय में फल देने लगती हैं। इसी दौरा गरमी सीजन वाली सब्जियां भी तैयार होती हैं। इसमें सीताफल, लौकी, तोरी और अन्य सब्जियां तैयार होती है, जो किसानों की आमदनी का यह सबसे अच्छा समय होता है। इस दौरान आइसीएआर के उप महानिदेशक डाक्टर एके सिंह ने बागवानी फसलों का विस्तार से ब्यौरा दिया। इस मौके पर सभी राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Posted By: Nitin Arora

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