राज्य ब्यूरो, कोलकाता। सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य का नाम बदलने की दिशा में कार्य शुरू किया था। नाम बदलने के लिए राज्य सरकार ने सिंतबर 2011 में भी प्रस्ताव भेजा था। लेकिन, अब तक पश्चिम बंगाल का नया नामकरण नहीं हो सका है। परंतु, अब करीब ढाई वर्ष बाद नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 14 अप्रैल बांग्ला नववर्ष के मौके पर पशिचम बंगाल अंग्रेजी अक्षर डब्ल्यू नहीं बल्कि पी से लिखना शुरू हो सकता है। क्योंकि, पश्चिम बंगाल के नए नाम को लेकर केंद्र सरकार को भी कोई आपत्ति नहीं है। राज्य सरकार के दावे के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सहमति दे दी है। खबर है कि मुख्यमंत्री सचिवालय नवान्न से एक और पत्र जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय प्रस्ताव को संसद में पेश करने के लिए संसद मामले के मंत्रालय को भेज सकता है। आगामी माह के मध्य में संसद का बजट अधिवेशन शुरू होगा। कहा जा रहा है कि सब सही रहने पर इसी बजट सत्र में वेस्ट बंगाल अल्टरेशन आफ नेम अधिनियम 2014 को गृह मंत्रालय पेश कर सकता है। इसके बाद राष्ट्रपति से

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अनुमोदन लेने के बाद नए नामकरण के लिए अधिसूचना केंद्र सरकार जारी कर सकती है। केंद्रीय गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार के प्रस्ताव को लेकर केंद्र को कोई आपत्ति नहीं है। 2011 के सितंबर में ममता सरकार ने पश्चिम बंगाल का नाम डब्ल्यू नहीं बल्कि पी अक्षर से शुरू करने के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। इसके बाद से उक्त प्रस्ताव दिल्ली में लटका हुआ है। बंगाल सरकार का नए नामकरण को लेकर तर्क है कि सरकारी व अन्य कई योजनाओं में डब्ल्यू अक्षर से पश्चिम बंगाल का नाम शुरू होने की वजह से सबसे अंत में 24 वां स्थान पर नाम आता है। इसीलिए अंग्रेजी व हिंदी दोनों में ही पश्चिम बंगाल लिखा जाए। यानी पी से पश्चिम लिखा जाए। परंतु, पी से शुरू होने पर भी 21 वें स्थान पर ही बंगाल का नाम रहेगा।

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