नई दिल्ली, प्रेट्र। कोरोना वायरस को लेकर देश के वैज्ञानिक दिन-रात शोध में जुटे हुए हैं। हाल ही में हुए एक अनुसंधान में कहा गया है कि किसी संक्रमित व्यक्ति में सार्स-कोव-2 वायरस के जीनोम में होने वाला म्युटेशन जनसंख्या स्तर पर विविध स्वरूपों में दिखाई देता है। विज्ञानियों का कहना है कि यह अनुसंधान कोरोना वायरस के स्वरूपों के प्रसार और संक्रमण प्रभाव को लेकर पूर्वानुमान व्यक्त करने में बहुत उपयोगी साबित होगा। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि व्यक्तियों और आबादी के बीच वायरस में होने वाले उत्परिवर्तनों पर नजर रखने वालों को उन विषाणु स्थलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है जो कोविड-19 के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 के अस्तित्व के लिए अनुकूल या प्रतिकूल हैं।

इस अनुसंधान में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) से संबद्ध जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर स्थित जीवन विज्ञान संस्थान, गाजियाबाद स्थित वैज्ञानिक और अभिनव अनुसंधान अकादमी, हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-कोशिकीय और आण्विक जीवविज्ञान केंद्र (सीएसआइआर-सीसीएमबी) और जोधपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधानकर्ता शामिल थे।

कोरोना से उबरने में अश्वगंधा पर भारत और ब्रिटेन करेंगे परीक्षण

आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ब्रिटेन के लंदन स्कूल आफ हाईजीन एवं ट्रापिकल मेडिसिन के साथ मिलकर कोरोना के मरीजों के जल्द स्वस्थ होने में अश्वगंधा के इस्तेमाल की भूमिका का पता लगाने के लिए क्लीनिकल परीक्षण करेगा। आयुष मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ब्रिटेन के तीन शहरों-लीसेस्टर, बरमिंघम और लंदन में दो हजार लोगों पर अश्वगंधा का परीक्षण किया जाएगा। इसको लेकर दोनों संस्थानों के बीच समझौते हो गया है।

अश्वगंधा को सर्दी के भारतीय चेरी के रूप में जाना जाता है। यह एक पारंपरिक भारतीय जड़ी बूटी है जो ऊर्जा बढ़ाती है, तनाव को कम करती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। ब्रिटेन में भी यह आसानी से उपलब्ध है और इसे सुरक्षित भी माना जाता है।

Edited By: Shashank Pandey