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कैप्टन मछार के अदम्य साहस पर डॉक्टर दोस्त का बड़ा बयान, बताया कैसे काम कर गई 'मसल मेमोरी'

Published: Fri, 02 Oct 2026 02:07 AM (IST)

मुंबई के तिलकनगर में 39 वर्षीय मछार के मित्र और पड़ोसी का कहना है कि बेहद परिपक्व स्मित की जबरदस्त ...और पढ़ें

कैप्टन मछार के अदम्य साहस पर डॉक्टर दोस्त ने बताया कैसे काम कर गई 'मसल मेमोरी'

कैप्टन मछार के अदम्य साहस पर डॉक्टर दोस्त ने बताया कैसे काम कर गई 'मसल मेमोरी'

HighLights

  1. पायलटों को प्रशिक्षित करते हैं मछार, आपात स्थिति का ज्ञान 

  2. पायलट स्मित के स्वस्थ होने की कामना करती रही मुंबई

राज्य ब्यूरो, मुंबई। अपने अदम्य साहस से एक ही दिन में पूरी दुनिया की आंखों का तारा बन चुके भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार के लिए गृह नगर मुंबई में भी उनके मित्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए उनके बचपन से अब तक की यादों को जीवंत कर दिया।

मुंबई के तिलकनगर में 39 वर्षीय मछार के मित्र और पड़ोसी का कहना है कि बेहद परिपक्व स्मित की जबरदस्त मसल मेमोरी ने उन्हें इतनी विकट और असंभव से चुनौतियों के बीच भी त्वरित कार्रवाई के लिए तत्पर रखा।

पेशे से डॉक्टर जिनित शाह ने बताया कि मसल मेमोरी ने उन्हें चाकू लगने के बावजूद एक बड़ी त्रासदी से बचने में मदद की। डॉ. शाह ने कहा, ‘स्मित वास्तव में एक अच्छे व्यक्ति और दयालु हैं। वह हाल ही में दुबई चले गए थे। जब भी वह अपने माता-पिता से मिलने यहां आते थे, हम बात करते हैं।

स्मित के परिवार में चार सदस्य हैं

शाह ने बताया कि स्मित के परिवार में चार सदस्य हैं, जिनमें दो बच्चे हैं। स्मित त्वरित निर्णय लेने में बहुत अच्छे हैं। वह पायलटों को प्रशिक्षित कर रहे हैं और उनकी अपनी अकादमी है और शायद यही कारण है कि उन्हें आपातकालीन स्थिति में क्या करना है, इसका पूरा ज्ञान है।

मसल मेमोरी के कारण, वह चाकू लगने के बाद भी स्थिति को संभालने में सक्षम थे और 174 जिंदगियों को बचा लिए। मसल मेमोरी वह क्षमता है, जिसके तहत कोई शारीरिक गतिविधि स्वचालित रूप से बिना किसी सचेत विचार के की जाती है, जो पुनरावृत्ति और अभ्यास से विकसित होती है।

बचपन के दोस्त प्रतीक गांधी के अनुसार, वह हमेशा से ही बहुत शांत और संयमित हैं। परिवार के अनुसार, स्मित के माता-पिता उनके उपचार और हालचाल के लिए सऊदी अरब रवाना हो चुके हैं। पड़ोसियों ने यह भी याद किया कि उन्होंने मछार के परिवार को घटना के बारे में जानने के बाद एयरपोर्ट जाने में मदद की।

हाथों में तिरंगा लिए घर के बाहर एकत्र लोग

मुंबई के तिलक नगर की सोसायटी में माहौल भावुक था, जहां कैप्टन स्मित मछार ने अपनी जिंदगी के कई साल बिताए। ताबुक में उपचार करा रहे स्मित के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना लेकर बड़ी संख्या में लोग उनके आवास के बाहर जुटे।

हाथों में तिरंगा और स्मित की तस्वीरें लिए लोगों ने उनके साहस को सलाम किया और उनके जल्द मुंबई लौटने की प्रार्थना की। मुंबई में पड़ोसियों और परिचितों के बीच उनकी बहादुरी की चर्चा होती रही।

फडणवीस ने बताया मुंबई का बेटा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी स्मित मछार के साहस और सूझबूझ की सराहना की। उन्होंने स्मित मछार मुंबई का बेटा बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी एक अक्टूबर को स्मित के परिवार से फोन पर बात की और उनके साहस की सराहना की है।