अनिल मिश्रा, जगदलपुर। विश्वव्यापी कोरोना वायरस के संकट के वक्त नक्सल प्रभावित बस्तर में शांति बहाली की मांग उठने लगी है। बुद्धिजीवियों ने कोरोना के बढ़ते खतरे के मद्देनजर बस्तर में फोर्स और नक्सलियों दोनों से शांति कायम रखने की अपील की है। इसके जवाब में पुलिस का कहना है कि कोरोना का खतरा तो है, मगर नक्सली हिंसा करेंगे तो जवाब तो देना ही पड़ेगा। नक्सली कोरोना वायरस के खतरे को अपने कैडर व आम जनता तक ले जाने पर आमादा हैं। बस्तर आइजी सुंदरराज पी ने कहा कि जवान जंगल में नक्सलियों की तलाश कर रहे हैं। यह कानून व्यवस्था का मामला है न कि युद्ध का। युद्धविराम की कोई बात ही नहीं है। फिर भी नक्सलियों को इस महामारी के दौर में मानवता दिखानी चाहिए।

कोरोना संकट के चलते युद्ध विराम की गई अपील

दरअसल, माओवादी समस्या पर काम कर रहे सीजीनेट स्वरा संस्था के संस्थापक शुभ्रांशु चौधरी व अन्य मानवाधिकारवादियों ने बस्तर पुलिस को पत्र लिखकर कोरोना संकट के दौर में युद्ध विराम की अपील की थी। शुभ्रांशु का कहना है कि माओवाद से जूझ रहे फिलीपीन में राष्ट्रपति ने कोरोना संकट के दौर में माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील की, जिसे माओवादियों ने मान लिया। थाईलैंड में वर्ष 2002 में सुनामी आई तो वहां भी सरकार ने माओवादियों से हथियार छोड़ संकट में साथ देने की अपील की थी। माओवादियों ने सरकार का साथ दिया। सुनामी के दौरान जो युद्धविराम हुआ, उससे थाईलैंड में 2005 में स्थायी शांति का मार्ग खुला। भारत में भी ऐसा होना चाहिए। बुद्धिजीवियों की अपील पर नक्सलियों की प्रतिक्रिया तो नहीं आई, लेकिन बस्तर आइजी ने पुलिस का पक्ष रखा है।

खुद सुरक्षति रहें, जनता को भी रहने दें

बस्तर आइजी सुंदरराज पी ने कहा कि पूरा देश कोरोना संकट से लड़ रहा है। 21 मार्च को नक्सलियों ने फोर्स के 17 जवानों की हत्या की। अभी बुधवार को एक ठेकेदार को मार दिया। पुलिस का काम है कानून व्यवस्था बनाए रखना। वे (नक्सली) पुलिस पर हमला करते हैं तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। यह नक्सलियों को सोचना है कि कोरोना संकट में जो वे कर रहे इसके नतीजे कितने घातक हो सकते हैं। हम तो यही चाहते हैं कि कोरोना से नक्सली भी सुरक्षति रहें और जनता को भी सुरक्षति रहने दें। अभी शनिवार को मुठभेड़ में हमारे 14 जवान घायल हुए हैं। उनका उपचार रायपुर में चल रहा है। अब डॉक्टर कोरोना महामारी को देखें या नक्सलियों द्वारा पैदा किए हिंसा के वायरस से निपटें। फोर्स के कैंपों में तो मेडिकल सुविधाएं हैं भी, नक्सलियों के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने कई ग्रामीणों को बंधक बना रखा है। रोज जंगल में ग्रामीणों की बैठक ले रहे हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों को जबरन बुलाते हैं। इससे कोरोना महामारी फैलने का खतरा है।

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