नवी पिल्लई को नोबेल की बधाई न देने पर शशि थरूर ने सरकार को घेरा, सोशल मीडिया पर होने लगी आलोचना
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई न देने का आरोप ...और पढ़ें

नवी पिल्लई के नोबेल सम्मान पर शशि थरूर ने सरकार को घेरा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ और भारतीय मूल की नवी पिल्लई को इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने थरूर के इस रुख की आलोचना की और उनकी अपनी पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्हें ही आड़े हाथों लिया।
नवी पिल्लई को मिला नोबेल सम्मान
पिल्लई के पूर्वज 130 साल पहले भारत से श्रीलंका और बाद में दक्षिण अफ्रीका गए थे। उनका जन्म 1941 में डरबन में हुआ था। उन्होंने गरीबी और रंगभेद के कड़े दौर का सामना किया। यूनिवर्सिटी ऑफ नटाल से कानून की पढ़ाई और हार्वर्ड लॉ स्कूल से डॉक्टरेट हासिल करने वाली पिल्लई 1995 में दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय की पहली अश्वेत महिला जज बनीं।
उन्होंने नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और रवांडा इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में अहम भूमिका निभाई। 1998 के ऐतिहासिक अकायेसु फैसले में उनके योगदान ने बलात्कार और यौन हिंसा को नरसंहार की श्रेणी में शामिल करने में मदद की।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शांति और अंतर्राष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए उन्हें 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया है।
शशि थरूर ने सरकार पर बोला हमला
एक्स पर एक पोस्ट साझा कर शशि थरूर ने लिखा कि भारतीय मूल की इस असाधारण महिला को नोबेल जीते छह दिन हो चुके हैं, लेकिन उनके पूर्वजों के देश, भारत सरकर, ने उन्हें बधाई तक नहीं दी। उन्होंने इसे निंदनीय बताया और संकीर्ण सोच वाले लोगों को शर्म करने की बात कही।
इस पोस्ट के साथ एक एआई-जनरेटेड वीडियो भी था, जिसमें उनके बस ड्राइवर पिता की बेटी से लेकर देश की पहली अश्वेत जज बनने तक के संघर्ष को दिखाया गया था। वीडियो में बताया गया कि कैसे उन्होंने गोरे वकीलों और भेदभावपूर्ण सिस्टम के खिलाफ संघर्ष किया, राजनीतिक कैदियों का बचाव किया और अंततः मंडेला के साथ न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाया।
सोशल मीडिया पर उठा विवाद
शशि थरूर की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और कई लोगों ने उनकी आलोचना की। प्रियंका नाम की एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि उन्हें नोबेल पाखंड पुरस्कार मिलना चाहिए।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने थरूर की पोस्ट को हैरान करने वाला बताया। उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (2008-2014) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान नवी पिल्लई ने मानवाधिकारों के मुद्दों पर लगातार भारत की तीखी आलोचना की थी, जिसका भारत सरकार ने आधिकारिक जवाब भी दिया था।
सिब्बल ने सवाल किया कि क्या सिर्फ भारतीय मूल का होने मात्र से भारत सरकार को उन्हें बधाई देनी चाहिए, जबकि उनके नीतिगत मतभेद जगजाहिर रहे हैं।
