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गणतंत्र दिवस व अफजल गुरु की बरसी पर बड़ी वारदात की फिराक में आतंकी, सुरक्षा एजेसियां सतर्क

Terrorists trying to infiltrate on Republic Day, जैश-ए-मोहम्मद एक बार फिर गणतंत्र दिवस व अफजल गुरु की बरसी पर बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश में जुट गया है।

By Arti YadavEdited By: Published: Wed, 16 Jan 2019 08:52 AM (IST)Updated: Wed, 16 Jan 2019 08:52 AM (IST)
गणतंत्र दिवस व अफजल गुरु की बरसी पर बड़ी वारदात की फिराक में आतंकी, सुरक्षा एजेसियां सतर्क
गणतंत्र दिवस व अफजल गुरु की बरसी पर बड़ी वारदात की फिराक में आतंकी, सुरक्षा एजेसियां सतर्क

जम्मू, नवीन नवाज। Terrorists trying to infiltrate on Republic Day, जम्मू-कश्मीर विधानसभा (Jammu And Kashmir) और उसके तीन माह बाद संसद में आत्मघाती हमले (Suicide Attack) कर राज्य में आतंकी हिंसा को नया रंग देने वाला जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-E-Mohammad) एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश में जुट गया है। इस साजिश को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा जैश सरगना मसूद अजहर के भतीजे हुजैफा और तीन अन्य बड़े कमांडरों अब्दुल रशीद गाजी, मोहम्मद उमर और मोहम्मद इस्माइल को सौंपा गया है। फिलहाल, सुरक्षाबलों ने जैश की साजिश को अमलीजामा पहनाने आए उसके कमांडरों को मार गिराने का अभियान छेड़ दिया है।

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हालांकि, सभी सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस के अधिकारी जैश के नामी कमांडरों की कश्मीर में मौजूदगी और किसी बड़ी वारदात की उनकी तैयारी को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि हुजैफा व अब्दुल रशीद गाजी अक्टूबर 2018 के अंतिम सप्ताह में ही जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं, जबकि मोहम्मद इस्माइल और उमर उनके आगमन से कुछ माह पहले से कश्मीर में हैं। गाजी, इस्माइल व उमर तीनों अफगान युद्ध में भाग ले चुके हैं। हुजैफा और गाजी के साथ तीन और आतंकी आए थे, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पाई है। गाजी की उपस्थिति की कश्मीर में पुष्टि दिसंबर के दौरान हुई थी।

अफजल ब्रिगेड ने कई सनसनीखेज वारदात को दिया है अंजाम
सूत्रों ने बताया कि अक्टूबर 2001 में श्रीनगर में राज्य विधानसभा और उसके बाद 13 दिसंबर 2001 को संसद पर सनसनीखेज हमले को अंजाम देकर जैश के संस्थापक अजहर मसूद ने 2013 के बाद प्रदेश में अपना नेटवर्क फिर से मजबूत करना शुरू किया था। उसने स्थानीय युवकों को फिर अपने साथ जोड़ने के लिए संसद हमले के मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु की फांसी के बाद उसके नाम पर अफजल गुरु ब्रिगेड का गठन किया। इसका जिम्मा सिर्फ जम्मू कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में महत्वपूर्ण सरकारी और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना है। उन्होंने बताया कि अफजल ब्रिगेड ने पठानकोट एयरबेस से लेकर जम्मू में सुंजवा व नगरोटा स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों को अंजाम देने के अलावा दक्षिण कश्मीर के पुलवामा व अवंतीपोर में भी कई सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है।

वादी में जैश के 75 विदेशी और 30 से 40 स्थानीय आतंकी सक्रिय
सूत्रों ने बताया कि जम्मू या पठानकोट हमलों में जैश के आतंकियों ने सरहद पार करने के चंद घंटों बाद हमले किए थे। जबकि कश्मीर के पुलवामा और अवंतीपोर में अफजल गुरु ब्रिगेड के नाम पर हुए हमलों में जैश ने अपने स्थानीय कैडर का भी विदेशी आतंकियों संग इस्तेमाल किया है। उन्होंने बताया कि करीब छह साल पहले तक जैश-ए-मोहम्मद जो वादी में सिर्फ सात से आठ आतंकियों तक सिमट चुका था, इस समय उसके करीब 75 विदेशी आतंकियों के अलावा 30 से 40 स्थानीय आतंकी सक्रिय हैं।

अजहर मसूद अपने परिवार के दो सदस्यों की मौत से काफी उत्तेजित
आइसी 814 कंधार विमान कांड के बाद सुर्खियों में आए अजहर मसूद बीते दो वर्षो के दौरान अपने परिवार के दो सदस्यों की मौत से काफी उत्तेजित है। उसका एक भांजा तल्हा रशीद नवंबर 2017 को अगलर पुलवामा में अपने दो साथियों संग मारा गया था। उसके बाद बीते साल 31 अक्टूबर 2018 को उसका भतीजा उस्मान इब्राहिम भी पुलवामा के छन्नकतर त्राल में मारा गया। उसकी मौत के बाद अजहर ने बयान जारी कर कहा था कि उसकी शहादत का जल्द ही बदला लिया जाएगा।

कुछ दिनों से उत्तरी कश्मीर में अपने किसी सेफ हाउस में हैं छिपे
सूत्रों की मानें तो अजहर का भतीजा हुजैफा जिसके पिता का नाम इब्राहिम अजहर उर्फ डॉक्टर उर्फ सुलेमान है, अब्दुल रशीद गाजी व दो अन्य आतंकियों संग जब कश्मीर पहुंचा तो उन्हीं दिनों उस्मान की मौत हुई थी। गत दिसंबर के दौरान यह लोग दक्षिण कश्मीर में ही थे और बीते कुछ दिनों से उत्तरी कश्मीर में अपने किसी सेफ हाउस में हैं। यह लोग अपने स्थानीय नेटवर्क के साथ गणतंत्र दिवस और उसके बाद अफजल गुरु की बरसी के दौरान फरवरी में किसी बड़े आत्मघाती हमले को अंजाम देने का मौका तलाश रहे हैं।


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