कोलंबो, एजेंसी। श्रीलंका में पिछले माह ईस्टर के मौके पर हुआ आत्मघाती हमला तो सभी को याद होगा। इस हमले में शुरूआत में लगभग 200 लोगों के मारे जाने की सूचनाएं प्रकाश में आई थी। इस हमले के बाद से ही पुलिस इससे जुड़े आतंकी संगठन की तलाश कर रही थी। अब यहां हुए इस आतंकी हमले के तार तमिलनाडु से भी जुड़ गए हैं।

श्रीलंका के एक कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु ने दावा किया है कि तमिलनाडु के एक इस्लामिक संगठन ने श्रीलंकाई आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) को आतंकी हमले के लिए उकसाया था। पिछले माह श्रीलंका के सेना प्रमुख ने कहा था कि कुछ आत्मघाती हमलावर प्रशिक्षण लेने या विदेशी संगठनों से कुछ और संपर्क बनाने के लिए कश्मीर और केरल गए थे।

बीते 21 अप्रैल को श्रीलंका में हुए आत्मघाती हमलावरों ने तीन चर्चो और तीन होटलों को निशाना बनाया था। इन हमलों में करीब 260 लोग मारे गए थे और 500 घायल हुए थे। इन हमलों के लिए आतंकी संगठन आइएस से जुड़े एनटीजे को जिम्मेदार ठहराया गया था। विवादास्पद तरीके से जेल से छूटकर आए कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षु गालगोडाट्टे ज्ञानसरा ने इस बारे में जानकारी दी। 

उसने कहा कि 'तमिलनाडु तौहीद जमात (टीएनटीजे) के दो लोग अयूब और आब्दीन श्रीलंका आए थे। उन्होंने यहां पर अब्दुल रजिक से मुलाकात की थी। इसका मकसद हमला करने के लिए उकसाना था।' श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेन ने अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए ज्ञानसरा की रिहाई का आदेश दिया था।

ज्ञानसरा को उसके मुस्लिम विरोधी रुख के लिए जाना जाता है। 2013 में श्रीलंका के पश्चिमी प्रांत में मुस्लिमों के खिलाफ हुए दंगों के लिए ज्ञानसरा को ही जिम्मेदार ठहराया गया था। उसकी रिहाई की कई अल्पसंख्यक और मानवाधिकार अधिकार समूहों ने आलोचना की थी।

उधर श्रीलंका में प्रतिबंधित आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) से ताल्लुक रखने वाले 41 संदिग्ध आतंकियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। पुलिस प्रवक्ता रुवन गुणशेखरा ने बताया कि संदिग्ध आतंकी फिलहाल आतंकी जांच विभाग और अपराध जांच विभाग की हिरासत में हैं। इन संदिग्धों के बैंक खातों की जांच में ये बात भी सामने आ रही है कि इनके खाते में कुल 13 करोड़ 40 लाख रुपये जमा हैं। पुलिस टीमें इस बारे में और भी जानकारियां जुटा रही हैं। 

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Posted By: Vinay