विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

परिसरों में जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए 'रोहित वेमुला बिल' ला रही तेलंगाना सरकार, जानिए इसमें क्या खास है

Published: Tue, 20 Oct 2026 02:39 PM (IST)

तेलंगाना सरकार राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह रोकने के लिए 'रोहित वेमुला बिल' लाने की तैयारी में है।

रोहित वेमुला बिल लाने की तैयारी में तेलंगाना सरकार

रोहित वेमुला बिल लाने की तैयारी में तेलंगाना सरकार

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। तेलंगाना सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह रोकने के लिए रोहित वेमुला बिल लाने की तैयारी में जुट गई है।

फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के पुराने नियमों के तहत व्यवस्था संचालित होती है, लेकिन अब सरकार छात्रों की सुरक्षा, समान अवसरों की गारंटी और शिकायतों पर सख्त जवाबदेही तय करने के लिए एक कानून लाने जा रही है।

इस प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार करने के लिए नालसार लॉ यूनिवर्सिटी की मदद ली जाएगी। इसके साथ ही इस प्रक्रिया में छात्रों, शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों की भी महत्वपूर्ण राय ली जाएगी ताकि कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

क्या होंगे नए और कड़े प्रावधान?

संभावित प्रावधानों के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर कई तरह के पूर्वाग्रहों और उत्पीड़न को स्पष्ट रूप से भेदभाव माना जाएगा। इनमें मुख्य रूप से वाइवा में जानबूझकर कम अंक देना, स्कॉलरशिप रोकना, रिसर्च के अवसर छीनना या हॉस्टल छोड़ने का मानसिक व सामाजिक दबाव बनाना शामिल है।

इसके अलावा, कॉलेजों के भीतर एससी-एसटी प्रतिनिधियों वाली विशेष जांच समितियों का गठन किया जा सकता है, जो पूरी पारदर्शिता के साथ मामलों की सुनवाई करेंगी। इन समितियों के लिए किसी भी शिकायत की जांच प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरी करने का सख्त प्रावधान भी संभव है।

भेदभाव साबित होने पर होगी कार्रवाई

अगर संस्थानों में जातिगत भेदभाव का आरोप साबित होता है, तो दोषियों के खिलाफ बेहद कड़े कदम उठाने की तैयारी है। इसमें पीड़ित छात्र को उचित मुआवजा देना, दोषी शिक्षक का तत्काल निलंबन या बर्खास्तगी और दोषी छात्र के निष्कासन जैसे कड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

इसके साथ ही, नियमों का पालन न करने वाले लापरवाह कॉलेजों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। पीड़ितों की सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने और फैसले के खिलाफ अपील करने की उचित व्यवस्था भी इस बिल का हिस्सा होगी।

गौरतलब है कि यूजीसी के साल 2012 के पुराने नियमों में प्रवेश रोकने, कम अंक देने, स्कॉलरशिप रोकने, हॉस्टल में अलग बैठाने जैसी बातें थीं। साथ ही कक्षा में किसी छात्र को आरक्षित वर्ग का छात्र बताकर अपमानित करना या उसकी जाति पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना पहले से ही प्रतिबंधित है, लेकिन अब तेलंगाना सरकार इसे और अधिक कानूनी मजबूती देने की तैयारी कर रही है।