चुनावी राजनीति में युवाओं की एंट्री आसान करेगी तेलंगाना सरकार, न्यूनतम उम्र 21 साल करने पर विचार
तेलंगाना सरकार विधानसभा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा को 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने का एक अहम प्रस्ताव पारित करेगी।

लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 साल करने की तैयारी में तेलंगाना सरकार
HighLights
लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 साल करने की तैयारी में तेलंगाना सरकार
अगस्त के पहले सप्ताह में विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार को इस बाबत भेजा जाएगा प्रस्ताव
सीएम ने कहा, देश की 30 प्रतिशत आबादी युवा, संसद में प्रतिनिधित्व एक प्रतिशत से भी कम
पीटीआई, हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे और राजनीतिक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है।
हैदराबाद में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित एक कैंडल लाइट रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि राज्य सरकार जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी।
इस सत्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा को 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने का एक अहम प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस कदम के पीछे देश की युवा शक्ति (जेन-जी) के प्रति अटूट विश्वास और उनके अधिकारों की पैरवी की है। उन्होंने यह रेखांकित किया कि देश की कुल आबादी का 30 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद, संसद में युवाओं का प्रतिनिधित्व एक प्रतिशत से भी कम है।
उन्होंने कहा कि जब 21 वर्ष की आयु का युवा देश का भविष्य तय करने और मंत्री बनने का अधिकार पाएगा, तभी वास्तव में लोकतंत्र मजबूत होगा।
विश्व के अन्य लोकतांत्रिक देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में 18 वर्ष की आयु का युवा प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है, वहीं सिंगापुर में 21 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनने का प्रविधान है। ऐसे में भारत के युवाओं को भी यह अवसर मिलना चाहिए।
संविधान में आवश्यक संशोधन कर इस बदलाव को लागू करने के लिए तेलंगाना सरकार अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र आयोजित कर केंद्र सरकार को अपना प्रस्ताव भेजेगी।
यह पहल देश के राजनीतिक गलियारों में युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
