तेलंगाना में माओवादी आंदोलन का अंत नजदीक: केवल 11 अंडरग्राउंड, डीजीपी ने की समर्पण की अपील
तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने राज्य में बचे हुए मात्र 11 भूमिगत माओवादियों, जिनमें तीन महिला कमांडर भी ...और पढ़ें

डीजीपी ने 11 अंडरग्राउंड माओवादियों से समर्पण की अपील की
HighLights
डीजीपी ने शेष 11 भूमिगत माओवादियों से समर्पण की अपील की
पिछले दो वर्षों में 721 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है
सरकार पुनर्वास, वित्तीय सहायता और इलाज का अवसर दे रही है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवधर रेड्डी ने राज्य में बचे हुए मात्र 11 भूमिगत माओवादियों से हिंसा छोड़कर समर्पण करने की अपील की है।
इनमें तीन महिला कमांडर भी शामिल हैं। एक समय वारंगल के छात्रावासों से लेकर आदिलाबाद के जंगलों तक फैले माओवादी आंदोलन का केंद्र रहे तेलंगाना में अब इसकी कमर पूरी तरह टूट चुकी है।
डीजीपी ने 11 माओवादियों से समर्पण की अपील की
डीजीपी शिवधर रेड्डी ने कहा, 'हिंसा छोड़ दो, हथियार डाल दो और मुख्यधारा में आ जाओ। अपने परिवार के पास लौटो और सम्मानजनक जीवन जियो।'
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से कुल 721 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं, जिनमें 4 केंद्रीय समिति सदस्य, 19 राज्य समिति सदस्य और 36 डिविजनल समिति सदस्य शामिल हैं।
कई वरिष्ठ माओवादी अब गांवों में शांतिपूर्वक रह रहे हैं और सरकार की मदद से नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं।डीजीपी ने तेलंगाना मूल के उन नेताओं से खास अपील की है जो अन्य राज्यों में एक्टिव हैं: गणपति, संतोष, मंगथू, सुजाता, रेला और रूपी।
पुनर्वास, वित्तीय सहायता और इलाज का अवसर
सरकार इन्हें वित्तीय सहायता, पुनर्वास लाभ और नई शुरुआत का मौका देगी। खासतौर पर बीमार माओवादी सुप्रीम कमांडर गणपति के लिए हैदराबाद में बेहतर इलाज की पेशकश की गई है। डीजीपी ने भूमिगत माओवादियों के परिवारों से भी अपील की कि वे अपने सदस्यों को समझाकर सरेंडर करवाएं।
ऐतिहासिक रूप से 1970-80 के दशक में भूमि विवाद, बेरोजगारी और आदिवासी असंतोष से पनपा यह आंदोलन 1980 में पीपुल्स वॉर ग्रुप के रूप में शुरू हुआ। 2005 में एक साल में ही 520 से अधिक मौतें हुईं। 1989 में ग्रेहाउंड्स फोर्स के गठन और 2014 के बाद तेलंगाना सरकार की काउंसलिंग व पुनर्वास नीति से स्थिति बदली।
हाल ही में 23 फरवरी को 40 साल से अधिक भूमिगत रहे टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने सरेंडर किया, जबकि 7 मार्च को 130 माओवादियों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के सामने 124 हथियार सौंपे।पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है।
चार दशक पुराने खून-खराबे का अंत अब सिर्फ 11 लोगों के फैसले पर टिका है। सरकार का संदेश साफ है- हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का साथ चुनें।
