नितिन प्रधान, नई दिल्ली। पासपोर्ट बनाने की नीति को आसान बनाने की सरकार की योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खासतौर पर डाकघरों के जरिए पासपोर्ट सेवा केंद्र चलाने की योजना को लेकर पेंच फंस गया है। देश भर में अब तक पासपोर्ट सेवा केंद्र चला रही निजी आइटी कंपनी टीसीएस इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह उसके साथ हुए करार की शर्तो का उल्लंघन है।

-टीसीएस ने डाकघरों से पासपोर्ट सेवाएं देने पर जतायी आपत्ति

-कंपनी ने लगाया सरकार के साथ हुए समझौते की शर्तो के उल्लंघन का आरोप

सरकार ने देश भर में नागरिकों के लिए पासपोर्ट बनाने की सुविधाएं बढ़ाने के लिए चुनिंदा डाकघरों को पासपोर्ट सेवा केंद्र में तब्दील करने का फैसला किया था। इसके तहत विदेश मंत्रालय और डाक विभाग को संयुक्त रूप से इस परियोजना पर अमल करना था। देश के कुछ हिस्सों में इस पर अमल भी शुरू हुआ और डाकघरों में पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरु हुए जिन्हें पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) कहा गया।

देश भर में पासपोर्ट सेवा केंद्र चला रही आइटी कंपनी टीसीएस ने सरकार के इस प्रयास पर आपत्ति जतायी है। कंपनी ने विदेश मंत्रालय को लिखे एक पत्र में इसे उसके साथ हुए करार की शर्तो का उल्लंघन बताया है। कंपनी का कहना है कि उसे देश भर में पासपोर्ट बनाने के लिए एक्सक्लूसिव अधिकार दिया गया था। अपने पत्र में करार के उस अनुच्छेद की याद दिलायी है जिसमें इस आशय का उल्लेख किया गया है।

टीसीएस ने अपने पत्र में कहा है कि 2007 में मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में यह स्पष्ट तौर पर कहा था कि भविष्य में यदि अन्य संस्थाओं को जोड़ने की बात आती है तो उन्हें केवल पासपोर्ट पोर्टल के इस्तेमाल की ही इजाजत होगी। बाद में जुड़ने वाली संस्थाओं को केवल पासपोर्ट आवेदन फार्म आनलाइन भरने और अप्वाइंटमेंट लेने की ही स्वीकृति होगी, लेकिन टीसीएस को पासपोर्ट संबंधित सभी तरह की सेवाओं का एक्सक्लूसिव अधिकार रहेगा।

दरअसल यह सारा विवाद तब पैदा हुआ जब सरकार ने डाकघरों में पासपोर्ट सेवा केंद्र स्थापित करने का फैसला लिया और डाककर्मियों के प्रशिक्षण के लिए टीसीएस की मदद मांगी गई। टीसीएस का कहना है कि डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों के संचालन का फैसला समझौते का साफतौर पर उल्लंघन है। देश में वर्तमान में करीब 200 पीओपीएसके चल रहे हैं।

टीसीएस का कहना है कि सरकार के पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट में वह सक्रियता से भागीदारी कर रही है। इस परियोजना को सफल बनाने की दिशा में कंपनी ने बड़ा निवेश भी किया है, लेकिन अगर इस प्रोजेक्ट की मूल भावना में बदलाव किया जाएगा तो कंपनी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

By Bhupendra Singh