TATA की अंदरूनी कलह: ट्रस्टी वेणु ने नोएल टाटा की नियुक्ति पर क्यों उठाए सवाल, आगे क्या होगा?
टाटा ट्रस्ट्स में अंदरूनी कलह सामने आई है, जहां ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर ट्रस्टों ...और पढ़ें

वेणु श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर नोएल टाटा की नियुक्ति की जांच की मांग की

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स के अंदर चल रहा झगड़ा अब सतह पर आ गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर दोनों ट्रस्टों के संचालन में गंभीर खामियों की जांच की मांग की है। वेणु के साथ समूह के एक और ट्रस्टी हैं।
श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में एसडीटीटी के स्थायी ट्रस्टी के रूप में नोएल एन. टाटा की नियुक्ति एवं मौजूदा स्थिति, नोएल टाटा के बेटे नेविल एन. टाटा की नियुक्ति और टाटा संस के निदेशक के रूप में अपनी स्वतंत्र भूमिका को सीमित करने के प्रयासों पर सवाल उठाए हैं।
जिस तरह से इस कारपोरेट लड़ाई में दोनों पक्ष एक के दूसरे के खिलाफ आक्रामक होते जा रहे हैं उससे देश के इस सबसे बड़े औद्योगिक घराने की मध्यावधि और दीर्घावधि रणनीति को लेकर सवाल गंभीर होते जा रहे हैं।
नोएल टाटा की परपेचुअल ट्रस्टी नियुक्ति और चेयरमैन बनने पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि वेणु श्रीनिवासन ने नोएल टाटा की परपेचुअल ट्रस्टी की हैसियत और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बनने के आधार पर सवाल उठाए हैं। परपेचुअल ट्रस्टी ऐसा ट्रस्टी होता है, जिसका कार्यकाल सीमित नहीं होता।
वह ट्रस्ट में स्थायी या आजीवन सदस्य माना जाता है, हालांकि वह इस्तीफा दे सकता है या अयोग्य करार दिया जा सकता है। श्रीनिवासन की शिकायत ऐसे समय आई है जब टाटा संस के नेतृत्व, कंपनी की शेयर बाजार में संभावित सूचीबद्धता और टाटा ट्रस्ट के अधिकारों को लेकर विवाद गहरा गया है।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। श्रीनिवासन ने आरोप लगाया है कि 16 सितंबर को एसडीटीटी की ओर से जारी प्रस्ताव के जरिये उन्हें टाटा संस की प्रस्तावित सूचीबद्धता से जुड़े मामलों में भाग लेने और मतदान करने से रोकने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा है कि यह उनकी स्वतंत्र राय और मतदान के अधिकार को सीमित करने की कोशिश थी। इसके अगले दिन टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में श्रीनिवासन ने मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की तीसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति और कंपनी की सूचीबद्धता की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। वहीं, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोनों प्रस्तावों का विरोध किया था।
टाटा संस के व्यावसायिक मामलों में ट्रस्ट के बढ़ते दखल पर भी जताया एतराज
श्रीनिवासन ने अपनी शिकायत में टाटा ट्रस्ट और एसडीटीटी की ओर से टाटा संस के व्यावसायिक मामलों में बढ़ती भागीदारी पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी होने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि वह कंपनी के व्यावसायिक एवं रणनीतिक मामलों में सीधे दखल दे।
उन्होंने खासकर टाटा संस से जुड़े वाणिज्यिक लेनदेन और शापूरजी पालोनजी समूह के लिए नकदी से जुड़े एक प्रस्ताव में ट्रस्ट के चेयरमैन और उसके संचालन दल की भूमिका का उल्लेख किया है।
श्रीनिवासन ने एसडीटीटी के प्रशासन और संचालन की तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने नोएल टाटा को एसडीटीटी की उन बैठकों या परिपत्र प्रस्तावों से अलग रखने के निर्देश देने की भी मांग की है, जिनमें टाटा संस की आम बैठकों के लिए ट्रस्ट की ओर से निदेशक, प्रतिनिधि या प्राक्सी की नियुक्ति, नामांकन या उन्हें निर्देश देने से जुड़े फैसले किए जाएं।
