टाटा ग्रुप विवाद: अब आमने-सामने आए देश के दो दिग्गज वकील, साल्वे और सिंघवी में छिड़ी कानूनी जंग
टाटा समूह के अंदरूनी विवाद में अब देश के दो दिग्गज वकील, हरीश साल्वे और अभिषेक मनु सिंघवी, आमने-सामने आ ...और पढ़ें

टाटा ग्रुप विवाद में हरीश साल्वे और अभिषेक मनु सिंघवी आमने-सामने

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टाटा समूह के भीतर छिड़ा अंदरूनी विवाद अब देश के दो सबसे दिग्गज वकीलों, हरीश साल्वे और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, के बीच सीधी कानूनी लड़ाई में बदल गया है।
दिलचस्प बात यह है कि साइरस मिस्त्री विवाद के दौरान टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स का एक साथ पक्ष रखने वाले ये दोनों दिग्गज अब अलग-अलग पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
आमने-सामने देश के दो दिग्गज वकील
इस मामले में अभिषेक मनु सिंघवी, टाटा संस के फैसलों को चुनौती दे रहे टाटा ट्रस्ट्स का प्रमुख चेहरा बन गए हैं। वहीं दूसरी ओर, हरीश साल्वे मजबूती से टाटा संस और उसके चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बचाव में खड़े हैं। यह स्थिति टाटा-मिस्त्री विवाद के बिल्कुल उलट है, जब दोनों ने एक सुर में टाटा संस और उसमें ट्रस्ट्स की सर्वोच्च स्थिति का बचाव किया था।
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क
अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया है कि टाटा संस शेयरधारकों के अधिकारों को कमजोर कर रहा है और तय कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का केवल कानूनी समाधान ही संभव है।
सिंघवी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के टाटा-मिस्त्री फैसले—जिसमें ट्रस्ट्स को टाटा संस पर प्राथमिकता दी गई थी—को जानबूझकर भुला दिया गया है।
साल्वे का तर्क
दूसरी ओर, हरीश साल्वे ने एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का सार्वजनिक समर्थन किया है। साल्वे का तर्क है कि टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग से विवाद की मुख्य वजह बने प्राइवेट कंपनी के प्रतिबंधात्मक नियम अपने आप खत्म हो जाएंगे और बोर्डरूम का टकराव थमेगा।
उन्होंने कहा कि लिस्टिंग का विरोध करने वाले कॉर्पोरेट गवर्नेंस की नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और निजी हितों की चिंता कर रहे हैं।
