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तमिलनाडु में 'विजय युग': TVK की जीत से लगा 60 सालों के सियासी चक्र पर 'ब्लॉकबस्टर ब्रेक'

By Jitendra SharmaEdited By: Garima Singh
Published: Mon, 04 May 2026 10:00 PM (IST)

अभिनेता जोसेफ विजय की टीवीके पार्टी ने तमिलनाडु में 60 साल पुरानी द्रविड़ राजनीति की परिपाटी को तोड़ा है, जिससे राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हुई है।

टीवीके पार्टी बनाने वाले अभिनेता विजय

टीवीके पार्टी बनाने वाले अभिनेता विजय 

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जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। द्रमुक गया तो अन्नाद्रमुक आया और अन्नाद्रमुक गया तो फिर द्रमुक के हाथ में सत्ता..। दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में 60 सालों से चल रही इस राजनीतिक परिपाटी पर आखिरकार अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय ने 'ब्लाकबस्टर ब्रेक' लगा दिया।

स्पष्ट बहुमत से कुछ कदम पीछे खड़े रह जाने के बावजूद टीवीके की जीत ऐतिहासिक है, क्योंकि 59 वर्षों बाद पहली बार कथित द्रविड़ माडल पर राजनीति करने वाले दलों की मुट्ठी से राज्य बाहर निकला है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे विजय की सफलता उस उम्मीद भरे विकल्प की विजय है, जिसके लिए राज्य के मतदाताओं में छटपटाहट थी।

स्वयं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सहित डीएमके की हार और एआइएडीएमके को इस तरह खारिज कर दिया जाना उन राष्ट्रीय दलों के लिए भी भविष्य में संभावनाओं की राह खोल सकता है, जिन्हें द्रविड़ माडल में कदम रखने तक का अवसर इतने वर्षों में नहीं मिला।

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तमिलनाडु की सियासत की कहानी 

वर्ष 1967 में तमिलनाडु ने पहली बार द्रविड़ राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। तब कांग्रेस के हाथ से सत्ता छीनकर पहली बार द्रविडि़यन माडल के शिल्पकार पेरियार के अनुयायी और डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद न कभी कांग्रेस लौटी और न ही भाजपा या कोई अन्य राष्ट्रीय दल वहां अपनी जगह बना पाया।

जातीय राजनीति करने वाले छोटे-छोटे राजनीतिक दल कई बने और सत्ता में भागीदारी भी करते रहे, लेकिन सत्ता के दो ही ध्रुव रहे द्रमुक और अन्नाद्रमुक। मगर, इस बार चुनावी माहौल बदला हुआ था।

मतदाता न तो सत्ताधारी डीएमके के समर्थन में थे और न ही अन्नाद्रमुक के लिए मुखर थे। हां, करीब दस वर्ष पहले टीवीके पार्टी बनाने वाले अभिनेता विजय जरूर हर वर्ग के युवाओं में विशेष तौर पर चर्चा में थे।

संभावना जताई जा रही थी कि वह इस बार चुनाव में एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं, लेकिन यह उम्मीद शायद ही किसी को रही हो कि उनका फिल्मी स्टारडम द्रविड़ राजनीति के किले को इस तरह ढहा सकता है।

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तमिलनाडु के सियासी सितारे 

दरअसल, इससे पहले मेगा स्टार रजनीकांत ने भी 2017 में आरएमएम पार्टी बनाई, लेकिन 2021 में कदम वापस खींच लिए। सुपर स्टार कमल हासन 2018 में एमएनएम पार्टी बनाकर राजनीति में उतरे, लेकिन सफलता नहीं मिली। तमिल सिनेमा स्टार सरथकुमार हों या दिवंगत विजयकांत की पार्टी, कोई राजनीति में बड़ा फेरबदल नहीं कर सका।

ऐसे में माना जा रहा था कि हो सकता है कि मतदाता अभी विजय की राजनीतिक परिपक्वता को परखना चाहे, लेकिन परिणामों से स्पष्ट है कि डीएमके और एआइडीएमके से ऊब चुका मतदाता विकल्प के लिए व्याकुल था। एमके स्टालिन की हार सत्ताविरोधी प्रचंड लहर के साथ ही परिवावाद पर भी प्रहार मानी जा सकती है।

अभी सत्ता के सिंहासन से कुछ कदम दूरी पर खड़े टीवीके प्रमुख विजय किसके समर्थन से सरकार का गठन करेंगे, यह जल्द स्पष्ट हो जाएगा। इस तरह वह फिल्मी दुनिया से मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले अन्नाद्रमुक संस्थापक एमजीआर, जयललिता और एम. करुणानिधि की सूची में अपना नाम लिखवाने जा रहे हैं।

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हालांकि, भविष्य की राजनीति के ²ष्टिकोण से अगले पांच वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होंगे। यदि विजय राज्य में विकास की राजनीति को आगे बढ़ाते हैं तो यहां से द्रविड़ राजनीति का अध्याय उपसंहार की ओर बढ़ जाएगा। इसके साथ ही अन्य राष्ट्रीय दलों के लिए प्रतिस्पर्धी जमीन यहां तैयार होने की संभावना बढ़ जाएगी।

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