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तमिलनाडु में अब दवाएं बनीं हिंदी विरोध का हथियार, त्रिभाषा फार्मूले पर छिड़ी जंग

Published: Thu, 08 Oct 2026 12:12 AM (GMT+05:30)

तमिलनाडु में दवा के पैकेटों पर हिंदी में निर्देश छपने से त्रिभाषा फॉर्मूले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

दवा पैकेटों पर हिंदी निर्देशों को लेकर तमिलनाडु में विवाद

दवा पैकेटों पर हिंदी निर्देशों को लेकर तमिलनाडु में विवाद

HighLights

  1. दवा पैकेटों पर हिंदी निर्देशों को लेकर तमिलनाडु में विवाद

  2. द्रमुक ने सरकार पर त्रिभाषा फार्मूला थोपने का आरोप लगाया

  3. सरकार ने कहा, पिछली द्रमुक सरकार ने ही यह व्यवस्था मंजूर की थी

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में हिंदी और त्रिभाषा फार्मूले के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है।

कोयंबटूर और करूर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली दवा के पैकेटों पर तमिल, अंग्रेजी के साथ हिंदी में निर्देश छपे मिलने के बाद मुख्य विपक्षी दल द्रमुक ने सत्तारूढ़ टीवीके सरकार पर तीखा हमला बोला है।

द्रमुक नेताओं का आरोप है कि राज्य में पिछले कई दशकों से चली आ रही द्विभाषा नीति के खिलाफ जाकर चुपचाप त्रिभाषा फार्मूला थोपने की कोशिश की जा रही है।

दवा पैकेटों पर हिंदी निर्देशों को लेकर तमिलनाडु में विवाद

विवाद बढ़ता देख अस्पतालों ने इन पैकेटों का इस्तेमाल तुरंत रोक दिया है। इस गरमागरम विवाद के बीच सरकार की ओर से भी कड़ा पलटवार सामने आया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के.जी. अरुणराज ने द्रमुक पर राजनीतिक अस्तित्व के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाने और भाषा के नाम पर केवल राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की पैकेजिंग को लेकर जो आपत्ति जताई जा रही है, वैसी ही व्यवस्था खुद पिछली द्रमुक सरकार के कार्यकाल के दौरान दिसंबर 2025 में मंजूर की गई थी और जनवरी 2026 में जनता के बीच इन पैकेटों का वितरण किया गया था।

उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासन ने पुरानी व्यवस्था या डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि मांग के अनुसार ही स्टाक खरीदा था।

पिछली द्रमुक सरकार ने ही यह व्यवस्था मंजूर की थी

द्रमुक नेता और पूर्व मंत्री टीआरबी राजा ने करूर सेंटर में बांटी गई दवाओं के पैकेट की तस्वीरें शेयर कीं और अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम में चुपके से तीन-भाषा वाली पालिसी लागू कर रहे हैं।

हालांकि, सरकार ने दोहराया कि वह दिवंगत मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुराई की द्विभाषा नीति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सरकार ने विपक्षी दल को नसीहत दी है कि वह अपनी पुरानी गलतियों का ठीकरा मौजूदा प्रशासन पर फोड़ने के बजाय रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाए।