जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में कारोबार करना आसान बनाने की कवायद के तहत अब सरकार विदेश व्यापार के नियमों को सरल बनाने में जुट गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने वाणिज्य मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वस्तुओं की देश से बाहर आवाजाही से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने संबंधी कदम उठाए जाएं। इससे भारत के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग को और सुधारने में मदद मिलेगी।

ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के तहत देश से बाहर के कारोबार की श्रेणी में भारत का दुनिया में 190 देशों की सूची में 146वें स्थान पर है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक चूंकि इन मानकों पर भारत की रैंकिंग बेहद खराब है लिहाजा प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में मंत्रालय से कदम उठाने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय की लॉजिस्टिक डिविजन ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है और कई प्रक्रियागत दिक्कतों को दूर कर दिया जाएगा। इससे अगले साल की रिपोर्ट में अपेक्षाकृत सुधार होने की उम्मीद है।

इस दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए मंत्रालय ने विदेश व्यापार से जुड़े सभी पक्षों बंदरगाहों, कस्टम, रेगुलेटरी निकायों से अपने कामकाज को ऑनलाइन बनाने का आग्रह किया है। अधिकारी ने बताया कि सभी से कहा गया है कि वे निर्यात और आयात से जुड़ी सभी मंजूरियां आनलाइन दें। कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए कागजी कार्यवाही को इस प्रक्रिया से दूर किया जाए। मंत्रालय का मानना है कि इससे न केवल समय बचेगा बल्कि कारोबारियों की लागत भी कम होगी।

मंत्रालय ने कस्टम विभाग से डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी शुरू करने का आग्रह भी किया है। इससे कार्गो की आवाजाही की रफ्तार बढ़ेगी। निर्यातकों के मुताबिक अभी कार्गो क्लियरिंग में काफी दिन लगते हैं जिससे काफी वक्त बर्बाद होता है और कारोबारियों की लागत भी बढ़ती है। डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी सुविधा शुरू हो जाने से इसमें लगने वाला समय केवल 50 घंटे का रह जाएगा।

 

Posted By: Tilak Raj

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