नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। भारत-पाक के बीच तनाव चरम पर है। मंगलवार को भारत ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर Air Strike की और आतंकी संगठन जैश के ठिकानों पर बम गिरा भारी तबाही मचाई। इस हमले में 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की खबर है। इसके अगले दिन (बुधवार) ही पाकिस्तान ने भारतीय सीमा में घुसकर नागरिक ठिकानों और सैन्य शिविर के आसपास बम गिराए हैं। इससे सीमा पर युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। इसके तुरंत बाद भारत व पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में कई एयरपोर्ट से उड़ाने स्थगित कर उन्हें खाली करा दिया गया है।

जानकारों के अनुसार युद्ध जैसी स्थिति में पहला निशाना वायु सेना के एयरबेस होते हैं। दुश्मन का प्रयास होता है कि वह वायु सेना और उसकी हवाई पट्टियों को सबसे पहले तहस-नहस करे। इससे वायु सेना निष्क्रिय हो जाएगी और उसके लड़ाकू विमान व मालवाहक विमान उड़ान नहीं भर सकेंगे। इससे देश की हवाई युद्ध क्षमता कमजोर पड़ जाएगी और वायु सेना के बैकअप के बिना थल सेना अलग-थलग पड़ जाएगी। इस स्थिति में दुश्मन देश के लिए हवाई हमला करना भी आसान हो जाता है।

इसी स्थिति से निपटने के लिए एक्सप्रेस-वे या अन्य प्रमुख हाईवे पर हवाई पट्टी बनाई जाती है और इन पर वायु सेना के विमान उतारकर अभ्यास भी किया जाता है। पिछले दिनों यमुना एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना ने मिराज-2000 फाइटर प्लेन उतारकर अपने पायलटों के कौशल का प्रदर्शन किया था। ये वही मिराज फाइटर प्लेन हैं, जिन्होंने मंगलवार को पाकिस्तानी सीमा में भारी तबाही मचाई थी। इसके अलावा वायु सेना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भी अपने हरक्युलिस विमान को उतारने का अभ्यास कर चुकी है। जानकारों के अनुसार दोनों एक्सप्रेस-वे पर विमान उतारने का ये अभ्यास ऐसी ही विषम परिस्थितियों के लिए किया जाता है।

इसी रणनीति के तहत अब देश में बन रहे लगभग सभी एक्सप्रेस-वे और ज्यादातर हाईवे के कुछ हिस्से को हवाई पट्टी के तौर पर तैयार किया जा रहा है। विषम परिस्थितियों में यहां सैन्य विमानों के अलावा अन्य तरह के विमान भी उतारे जा सकते हैं। खास तौर पर अलग-अलग वायुसेना एयरबेस के पास मौजूद राजमार्गों पर हवाई पट्टी बनाई जाती है। ऐसा इसलिए कि हमले के वक्त वायु सेना के विमानों को सुरक्षित करने के लिए एयरबेस से दूर एक्सप्रेस-वे पर बने रनवे पर पहुंचा दिया जाए। जरूरत पड़ने पर इसी रनवे से लड़ाकू विमान उड़ान भर, दुश्मन का मुकाबला भी कर सकेंगे। इस दौरान लड़ाकू विमानों को इन्हीं रोड रनवे पर ईंधन और हथियारों से लैस करने की व्यवस्था भी की जाती है। ट्रांसपोर्ट विमान भी सेना की जरूरत की चीजें व हथियार पहुंचाने के लिए इन रनवे का इस्तेमाल कर सकती हैं।

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय बना था रोड रनवे
रोड रनवे सबसे पहले नाजी जर्मनी में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत समय में बनाया गया था। इसे रैसैतोबा प्रणाली द्वारा अच्छी तरह से विकसित किया गया था। इसके बाद विमानों को इन रोड रनवे का इस्तेमाल करने को कहा गया था। शीत युद्ध के दौरान रोड रनवे को और व्यवस्थित ढंग से बनाया गया। जर्मनी, उत्तर कोरिया, चीन गणराज्य (ताइवान), स्वीडन, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया में सड़क के दोनों ओर लोहे के पर्दे लगाए गए।

कैसा होता है रोड रनवे का डिजाइन
रोड रनवे आमतौर पर हाईवे पर दो से 3.5 किलोमीटर लंबा बनाया जाता है, ताकि विमान को टेकऑफ और लैंडिंग के लिए पर्याप्त रनवे मिले। इसके लिए सड़क का वह हिस्सा बिल्कुल सीधा और समतल होना चाहिए। सड़क के नीचे की जमीन धंसने वाली नहीं होनी चाहिए और उस पर कोई ढलान भी नहीं होना चाहिए। जहां रनवे बनाना है वहां सड़क की चौड़ाई बाकी हिस्सों से ज्यादा होनी चाहिए। सड़क के दोनों ओर बिजली के खंभे, मोबाइल टॉवर आदि नहीं होने चाहिए, ताकि विमान सड़क की पूरी चौड़ाई का इस्तेमाल कर सकें।

सड़क के दोनों ओर इतनी जगह और व्यवस्था होनी चाहिए जिससे वहां फाइटर प्लेन को गाइड करने के लिए पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम लगाए जा सकें। सड़क पर डिवाइडर ऐसे हों जिन्हें तुरंत निकाला जा सके। इसके अलावा एयरबेस की सारी सुविधाओं को यहां आसानी से बनाया जा सकता है। रोड रनवे ऐसा होना चाहिए जो 24 से 48 घंटों में सड़क मार्ग से रोड रनवे में बदला जा सके। सड़क पर गंदगी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, ताकि विमान को आसानी से और बिना किसी भ्रम के लैंड कराया जा सके।

किन-किन देशों में हो चुका है रोड रनवे का इस्तेमाल
21 मई 2015 को भारत में रोड रनवे का इस्तेमाल पहली बार किया गया है। कई ऐसे देश हैं जहां इसका इस्तेमाल इससे पहले ही हो चुका है। भारत से पहले इसका इस्तेमाल, सिंगापुर, स्वीडन, फीनलैंड, जर्मनी, पोलैंड, चीन गणराज्य (ताइवान) कर चुके हैं। पाकिस्तान के पास भी ऐसे चार रोड रनवे हैं, जिसका इस्तेमाल वो युद्ध के दौरान आपात स्थिति में कर सकता है। पाकिस्तान का पहला रोड रनवे एम-1 है जो कि पेशावर से इस्लामाबाद हाईवे पर बनाया गया है। दूसरा एम-2 इस्लामाबाद-लाहौर हाइवे पर बनाया गया है। इन दोनों हाईवे पर 2700 मीटर के दो-दो एमरजेंसी रोड रनवे हैं।

जब एक्सप्रेस-वे पर एक साथ उतरे थे 16 सैन्य विमान
मौजूदा समय में नोएडा आगरा के बीच बने यमुना एक्सप्रेस-वे और आगरा लखनऊ के बीच बने एक्सप्रेस-वे पर रोड रनवे बना हुआ है। भारतीय वायुसेना ने पहली बार मई 2016 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मिराज-2000 लड़ाकू विमान उतारा था। नवंबर-2016 में भी आठ सुखोई-30 लड़ाकू विमान आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन समारोह में उतारे गए थे। 24 अक्टूबर 2017 को वायुसेना की एक एमेरजेंसी ड्रिल के दौरान C-130J सुपर हरक्युलिस मालवाहक विमान ने पहली बार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के रोड रनवे पर लैडिंग की थी। इसके तुरंत बाद ही छह मिराज-2000, छह सुखोई-30 और तीन जगुआर विमानों ने ड्रिल के तहत आपात लैंडिंग का अभ्यास किया था।

भारत में यहां हैं आपातकालीन रोड रनवे
यमुना एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के अलावा जनवरी 2018 में नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने आपात लैंडिंग के लिए राजस्थान के जैसलमेर और तमिलनाडु के रामानाथपुरम हाईवे पर पांच किमी का रोड रनवे बनाने की घोषणा की थी। इसके अलावा भारतीय वायुसेना ने आपात लैंडिग के लिए 12 राज्यों राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, असम, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु में भी हाईवे चिन्हित किए हैं। इन हवाई पट्टियों पर काम चल रहा है। योजना के अनुसार, आपातकाल के समय ये हाइवे मार्ग आम लोगों के लिए बंद कर दिए जायेंगे और ये पूरी तरह से विमानों के लैंडिंग के लिए इस्तेमाल में लाए जायेंगे।

Posted By: Amit Singh

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