नई दिल्ली, प्रेट्र। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रेस को एक रेखा खींचनी चाहिए और संतुलन कायम करना चाहिए क्योंकि मामलों के मीडिया ट्रायल की अनुमति नहीं दी जा सकती। उक्त शेल्टर होम में रह रहीं 42 में से 34 महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया था।

जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ पटना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें हाई कोर्ट ने मीडिया पर मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की जांच की रिपोर्टिग करने पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा, 'यह इतना साधारण मामला नहीं है। किसी एक बिंदु पर मीडिया पूरी तरह अति कर देता है। एक संतुलन होना चाहिए। आप जैसा कहना चाहते हैं वैसा ही नहीं कह सकते। आप मीडिया ट्रायल नहीं कर सकते। आप ही बताइए कि कहां रेखा खींची जाए।'

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाडे ने पीठ को बताया कि हाई कोर्ट ने इस मामले में मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और मामले की जांच कर रही सीबीआइ को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई की तिथि 18 सितंबर तक जवाब तलब किया।

पीठ को यह भी जानकारी दी गई कि हाई कोर्ट ने वहां लंबित मामले में 29 अगस्त को एक महिला वकील को न्यायमित्र नियुक्त करने का आदेश दिया था। साथ ही उन्हें कथित पीडि़तों से मिलने और पुनर्वास के उद्देश्य से उनका साक्षात्कार करने का निर्देश दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साक्षात्कार पर रोक लगाते हुए कहा कि कथित पीडि़तों का साक्षात्कार उसके पूर्व के आदेश के पूर्णत: खिलाफ है। इस आदेश में शीर्ष अदालत ने मीडिया से इन नाबालिग लड़कियों का साक्षात्कार नहीं करने को कहा था। पीठ ने साफ किया कि जांच एजेंसी को उनसे पूछताछ करने के लिए पेशेवर परामर्शदाताओं और बाल मनोचिकित्सकों की मदद लेनी चाहिए। बहस के दौरान नफाडे ने कहा कि जांच की रिपोर्टिग पर हाई कोर्ट का प्रतिबंध भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है। इस पर पीठ ने नफाडे से कहा कि वह इस मामले में अदालत की मदद कर सकते हैं। जब नफाडे ने कहा कि मीडिया पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं होना चाहिए तो पीठ ने कहा, 'हम इसे 18 सितंबर को देखेंगे।'

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Posted By: Arun Kumar Singh