जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को न्यायसंगत और भेदभाव रहित बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसमें दखल न देने का आग्रह किया है। यह भी कहा है कि ऐसे मामले में अतिउत्साही हस्तक्षेप के गलत परिणाम भी हो सकते हैं। सरकार ने टीकाकरण नीति पर दिए हलफनामे में कहा है कि अभूतपूर्व और विशिष्ट परिस्थितियों में एक्जीक्यूटिव पॉलिसी के तहत टीकाकरण अभियान तैयार किया गया है। कार्यपालिका की बुद्धि पर भरोसा किया जाना चाहिए। टीके की सीमित उपलब्धता और अन्य कारणों से एक साथ सभी का टीकाकरण संभव नहीं है। यह पूर्व के टीकाकरण अभियानों से भिन्न है। सरकार ने यह भी कहा है कि घर-घर जाकर टीकाकरण करना संभव नहीं है।

केंद्र ने टीकाकरण नीति को सही ठहराने वाला यह हलफनामा रविवार की देर शाम सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया। मामले पर सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई होनी थी लेकिन तकनीकी व्यवधान के कारण सुनवाई गुरुवार तक टल गई। केंद्र ने कहा है कि देश अभूतपूर्व गंभीर संकट और महामारी से जूझ रहा है, ऐसे में सरकार के प्रशासकीय अमले को जनहित में नीति तय करने का विवेकाधिकार दिया जाना चाहिए।

कीमतें तय करने से पहले टीका बना रही कंपनियों से किया गया व्यापक विमर्श

टीके की खरीद और टीकाकरण प्रक्रिया का उद्देश्य उम्र और जोखिम के आधार पर बराबरी से टीके का वितरण सुनिश्चित करना है। इसमें वंचित वर्ग का भी पूरा ध्यान रखा गया है। सुनिश्चित किया गया है कि राज्यों के बीच वैक्सीन वितरण में भेदभाव न हो और तर्कसंगत बराबरी रहे। कीमतें तय करने में भी देश में उपलब्ध दो वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ उच्च स्तरीय विचार विमर्श हुआ, ताकि राज्यों के बीच कीमतें समान रहें।

राज्यों ने मुफ्त टीकाकरण का एलान किया है, इसलिए कीमतों से जनता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा

राज्यों और केंद्र के लिए वैक्सीन की कीमतों में अंतर पर कहा गया कि केंद्र के व्यापक टीकाकरण अभियान को देखते हुए केंद्र ने राज्यों और निजी अस्पतालों की तुलना में वैक्सीन खरीद का बड़ा आर्डर जारी किया और इसलिए कीमतों के मोलभाव पर इसका असर पड़ा। हालांकि कीमत का टीकाकरण के वास्तविक लाभार्थी यानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि हर राज्य ने 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए मुफ्त टीकाकरण की घोषणा की है।

यह सुनिश्चित किया गया है कि टीके की बिक्री में बहुत ज्यादा लाभ न कमाएं कंपनियां

केंद्र ने कहा कि ये सुनिश्चित किया गया है कि वैक्सीन निर्माता ज्यादा लाभ न कमाएं। जो लोग खर्च वहन कर सकते हैं, वे निजी अस्पतालों में जाकर टीका लगवा सकते हैं, इससे टीकाकरण केंद्र पर भीड़ नहीं लगेगी। पेटेंट कानून और इमरजेंसी लाइसेंस पर सरकार ने कहा है कि राजनयिक स्तर पर दवाएं और वैक्सीन प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। दवाओं और जरूरी उपकरणों की कालाबाजारी रोकने के लिए हो रहे प्रयासों की भी सरकार ने जानकारी दी है।

घर-घर जाकर नहीं हो सकता टीकाकरण

घर-घर जाकर मोबाइल वैन से टीकाकरण की संभावनाओं पर सरकार का कहना है कि यह मुश्किल होगा। इसके कई कारण हैं। यह टीकाकरण अन्य अभियानों से भिन्न है। कोरोना का टीका हाल ही में तैयार हुआ है और इसकी उपलब्धता अभी सीमित है। कोरोना टीका दो डोज में चार से आठ सप्ताह के अंतर पर दिया जाता है। इसके एक वायल में 10 खुराक होती है। खुलने के बाद उसे निश्चित समय के भीतर प्रयोग करना होता है। घर-घर जाकर टीकाकरण से निश्चित समय में उसके प्रयोग की संभावना कम होगी, जिससे टीके की बर्बादी होगी।

टीका लगने के बाद 30 मिनट तक देखा जाता है उसका प्रभाव 

टीका लगने के बाद 30 मिनट तक उसका प्रभाव देखा जाता है। इसके लिए टीकाकरण केंद्रों पर संक्रमण से रोकथाम के प्रोटोकॉल अपनाते हुए व्यवस्था होती है। घर-घर जाकर टीका लगाने से 30 मिनट तक उसके प्रभाव को देखना मुश्किल होगा। किसी दुष्प्रभाव की स्थिति में व्यक्ति को तत्काल जरूरी चिकित्सा सहायता मिलना भी मुश्किल होगा। साथ ही घर-घर जाने से टीकाकरण में लगी टीम के संक्रमित होने का खतरा भी रहेगा।

 

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