'ट्रिब्यूनल के रिटायर हो रहे सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार करे सरकार', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह न्यायाधिकरणों में रिक्तियों के कारण कामकाज प्रभावित न हो, ...और पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरणों की निष्क्रियता पर चिंता जताई

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। न्याय की देहरी पर बैठे आम आदमी की उम्मीदों को संबल देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील टिप्पणी की है। इसने मंगलवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि रिक्तियों के कारण देश के न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) निष्क्रिय नहीं होने चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह सेवानिवृत्त हो रहे पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों के कार्यकाल को एक महीने या इससे कुछ अधिक समय के लिए बढ़ाने पर विचार करे, ताकि जब तक नई नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं, न्यायिक कार्य निर्बाध रूप से चलते रहें।
सुनवाई के दौरान, अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट को अवगत कराया कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, इसलिए तदर्थ विस्तार की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि यदि बिना नियुक्ति के याचिकाएं खारिज कर दी गईं, तो अदालतों में मुकदमों का एक नया दौर शुरू हो जाएगा और न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी।
पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण प्रहरी - नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तीन सदस्यों (दो न्यायिक और एक तकनीकी) के पद छोड़ने से इसके कामकाज पर पड़ने वाले गंभीर असर को कोर्ट ने महसूस किया।
न्यायहित में संवेदनशीलता दिखाते हुए पीठ ने एक अंतरिम उपाय के तहत इन सदस्यों का कार्यकाल नए पदों पर नियुक्ति होने तक बढ़ा दिया है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
