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नई दिल्‍ली, माला दीक्षित। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राम जन्मभूमि मामले में आठवें दिन की सुनवाई शुरू हो गई है। रामलला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन ने एएसआइ का हवाला दिया। उन्‍होंने एएसआई की रिपोर्ट का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इसमें इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि विवादित ढांचे से पहले वहां हिंदू मंदिर था।  वैद्यनाथन ने कोर्ट को आगे बताया कि साकेत मंडल के राजा गोविन्द चंद्र ने ग्यारहवी शताब्दी मे अयोध्या मे विष्णु हरि का सुन्दर मंदिर बनवाया था जिसकी पुष्टि वहां से मिले एक शिलालेख से होती है जिसमें पूरा वर्णन है।

बता दें कि सोमवार को मामले की सुनवाई नहीं हो पाई थीं क्‍योंकि पांच जस्‍टिस वाले बेंच में से एक जस्‍टिस बोबडे अस्‍वस्‍थ होने के कारण कोर्ट नहीं आ सके थे। कोर्ट इस मामले मे रोज़ाना सुनवाई कर रहा है।

स मामले की सुनवाई चीफ जस्‍टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में पांच जस्‍टिस की बेंच कर रही है। चीफ जस्‍टिस गोगोई के अलावा, जस्‍टिस बोबडे, जस्‍टिस डी वाइ चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस एस नजीर मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

यह है पूरा मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा व तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था। इस फैसले को भगवान रामलाल विराजमान सहित हिंदू, मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 अपीलें, तीन रिट पीटीशन और एक अन्य याचिका 2010 से लंबित हैं और कोर्ट के आदेश से फिलहाल अयोध्या में यथास्थिति कायम है। सुनवाई की शुरूआत मूल वाद संख्या तीन और पांच से हुई थी। मूल वाद संख्या तीन निर्मोही अखाड़ा का जबकि मूल वाद संख्या पांच भगवान रामलला विराजमान का मुकदमा है।

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Posted By: Monika Minal

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