नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल की वह याचिका स्वीकार कर ली है जिसमें उन्होंने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनक्लैट) के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा। एनक्लैट ने एस्सार स्टील में बोली लगाने की पात्रता के लिए आर्सेलर मित्तल को मंगलवार तक 7000 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। आर्सेलर मित्तल ने सोमवार को एस्सार स्टील के लिए बोली की रकम 20 फीसदी बढ़ाकर 42,000 करोड़ रुपये करने की घोषणा की थी।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश एएम खानविलकर व बीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि हम इस मामले में बुधवार को सुनवाई करेंगे। स्टील उद्योग के दिग्गज एलएन मित्तल के आर्सेलर मित्तल द्वारा एस्सार स्टील के लिए 42,000 करोड़ रुपये की बोली लगाए जाने के दूसरे दिन यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठा। आर्सेलर मित्तल ने एनक्लैट के सात सितंबर के फैसला को चुनौती दी है जिसमें रूस के वीटीबी-जेएसडब्ल्यू के कंसोर्टियम न्यूमेटल को एस्सार स्टील की दूसरे दौर की नीलामी के लिए पात्र घोषित किया था। एनक्लैट ने आर्सेलर मित्तल को डिफॉल्टर के दाग को साफ करने के लिए अपनी सब्सिडियरी के बकाया 7000 करोड़ रुपये 11 सितंबर तक चुकाने का भी आदेश दिया था। यह रकम चुकाने पर ही वह एस्सार स्टील की नीलामी में हिस्सा लेने के लिए पात्र होगी।

बैंकों का 49 हजार करोड़ बकाया बैंकों को एस्सार स्टील से 49000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया कर्ज वसूल करना है। एस्सार स्टील की पहले दौर की नीलामी में न्यूमेटल के अलावा आर्सेलर मित्तल इंडिया ने भी बोली लगाई थी। लेकिन एस्सार स्टील के कर्जदाता बैंकों की कमेटी (कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स) ने दोनों बोलियों को खारिज कर दिया था। बोली लगाने वाली दोनों ही कंपनियों के प्रमोटर ऐसी कंपनियों से जुड़े हैं जो बैंक लोन डिफॉल्टर हैं। ऐसे प्रमोटर आईबीसी कानून के सेक्शन 29ए के तहत अपात्र हैं।

Posted By: Manish Negi