नई दिल्ली, प्रेट्र। जल्लीकट्टू समर्थकों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में तमिलनाडु सरकार के नए कानून पर रोक लगाने से इन्कार किया है। हालांकि, राज्य में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर सरकार को फटकार भी लगाई। अदालत ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक मिश्रा और आरएफ नरीमन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार के अधिवक्ता से कहा, 'राज्य में ऐसी स्थिति थी, जिसको नियंत्रित किया जाना था। कृपया अधिकारियों को बताइये कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका प्रमुख दायित्व है।' शीर्ष अदालत ने इस मामले में नए कानून को चुनौती देने के लिए पशु अधिकार संस्थाओं और अन्य को अपनी लंबित याचिकाओं में बदलाव की अनुमति भी दे दी है।

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सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बताया कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में जल्लीकट्टू को अनुमति देने संबंधी 7 जनवरी 2016 को जारी अधिसूचना वापस लेने का आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना को चुनौती देने वाले पक्ष इस संदर्भ में बने नए कानून के खिलाफ याचिका डाल सकते हैं। पीठ ने केंद्र सरकार को इस बात की अनुमति प्रदान कर दी।

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Posted By: Monika minal