यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सांसदों और के खिलाफ जघन्य आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे संबंधी याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
जघन्य आपराधिक मामलों में दोषी सांसदों और विधायकों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और उनके खिलाफ मुकदमों के जल्द निपटारे का ...और पढ़ें

नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह जघन्य आपराधिक मामलों में दोषी सांसदों और विधायकों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और उनके खिलाफ मुकदमों के जल्द निपटारे का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगी। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस मामले पर सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
मालूम हो कि पीठ सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के बारे में जनहित याचिका पर समय-समय पर निर्देश देती रही है ताकि सीबीआइ और अन्य एजेंसियों द्वारा मामलों की त्वरित जांच सुनिश्चित की जा सके और हाई कोर्टों द्वारा विशेष अदालतों के गठन के अलावा मुकदमों की सुनवाई तेजी से पूरी हो सके। पीठ ने कहा कि सांसदों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई कर रही विशेष अदालतों के अधिकार क्षेत्रों को लेकर कुछ आवेदन दिए गए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को एक मुकदमे का हवाला देते हुए कहा था कि अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर अपने फैसले में अदालत ने निर्देश दिया था कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई निर्धारित मजिस्ट्रेट अदालत में होगी।
कपिल सिब्बल ने दलील दी थी, 'लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं हुआ है, इसलिए मामले (फौजदारी मुकदमे) सुनवाई के लिए सीधे सत्र अदालत में जाते हैं।' पीठ ने मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता को आश्वासन दिया था, 'हम मामले को सूचीबद्ध करेंगे।'
इससे पहले शीर्ष अदालत ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ सीबीआइ की ढुलमुल जांच पर चिंता व्यक्त की थी और तेजी से जांच करने, मुकदमों की सुनवाई पूरी करने और हाई कोर्टों द्वारा अतिरिक्त विशेष अदालतों के गठन के बारे में अनेक निर्देश दिए थे।
