क्या है अपार आईडी? जिसे लागू करने के लिए सीबीएसई को निर्देश देगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को 'अपार' आईडी के लिए मॉडल सहमति पत्र में बदलाव करने का निर्देश देने का फैसला ...और पढ़ें

HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने अपार आईडी सहमति पत्र में बदलाव का निर्देश दिया।
अभिभावकों को अब सहमति देने या मना करने का स्पष्ट विकल्प।
निजता और शिक्षा के मौलिक अधिकार का सम्मान सुनिश्चित होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश भर के लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। इसने स्पष्ट किया है कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को उड़ीसा हाईकोर्ट के उस फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगा, जिसमें 'अपार' (स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री) आईडी जारी करने के लिए माडल सहमति पत्र में बदलाव करने को कहा गया था।
इस संशोधन के बाद अब अभिभावकों को इस योजना से बाहर निकलने या अपनी सहमति देने से मना करने का स्पष्ट विकल्प मिलेगा।
'शिक्षा मौलिक अधिकार, 'आधार' की बाध्यता संविधान के खिलाफ'
यह पूरा मामला चार छात्रों के अभिभावकों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू की गई 12 अंकों की डिजिटल 'अपार' आईडी योजना को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने तर्क दिया कि सरकार इसे भले ही ऐच्छिक बताती हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से बच्चों को 'आधार' और 'अपार' आईडी के बिना परीक्षाओं में बैठने से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने के.एस. पुट्टस्वामी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और किसी भी बच्चे को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, उन्होंने 'डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी) 2023' के तहत डाटा सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा- 'निजता और कानून का पालन जरूरी'
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि केंद्र सरकार ने उड़ीसा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए इसे अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया जाएगा।
सीजेआई ने योजना के प्रशासनिक लाभों की सराहना करते हुए कहा कि देश की हर पहल को शक की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए; यह शैक्षणिक रिकार्ड और शिक्षक-छात्र अनुपात को बेहतर बनाने का एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीएसई के परिपत्र डाटा संरक्षण अधिनियम के प्रविधानों से ऊपर नहीं हो सकते और निजता के मौलिक अधिकार का पूर्ण सम्मान किया जाना अनिवार्य है।
क्या है 'अपार' आईडी?
'अपार' का पूरा नाम स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री है। यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा 'एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी' पहल के तहत शुरू किया गया 12 अंकों का एक विशिष्ट डिजिटल पहचान नंबर है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हिस्सा है। यह छात्रों के शैक्षणिक रिकार्ड (जैसे - मार्कशीट, डिग्री, क्रेडिट स्कोर, और अन्य उपलब्धियां) को आजीवन डिजिटल रूप से सुरक्षित रखता है।
इसके माध्यम से छात्र किसी भी शैक्षणिक संस्थान में आसानी से अपने क्रेडिट ट्रांसफर कर सकते हैं। नौकरी या प्रवेश के दौरान बार-बार मूल दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होती, केवल 'अपार' आईडी से सभी रिकार्ड सत्यापित हो जाते हैं। नामांकन प्रक्रिया की सुविधा अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) और डिजीलाकर से जुड़ी होती है। नाबालिग छात्रों के लिए इसे बनवाने हेतु माता-पिता की सहमति अनिवार्य होती है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
