नई दिल्ली, एजेंसी। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने सोमवार को देश में ड्रग माफिया नेटवर्क के संबंध में खतरे का आरोप लगाने वाले एक पत्र पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित (Uday Umesh Lalit) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उस समय के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को एक पत्र लिखा गया था, जिन्होंने पिछले साल 17 नवंबर को निर्देश दिया था कि इसे एक स्वत: संज्ञान मामले में परिवर्तित किया जाए।

पीठ ने एक वकील को किया नियुक्त

मालूम हो कि इस पीठ में उदय उमेश ललित के साथ न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला भी शामिल हैं। उन्होंने वकील शोएब आलम को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त किया। उन्होंने वकीन आलम को अपनी पसंद के एक एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड (AOR) की मदद लेने की भी आजादी दी।

शोएब आलम न्याय मित्र के रूप में करेंगे कोर्ट की मदद

मालूम हो कि 17 नवंबर 2021 को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखे गए कार्यालय नोट को मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर इसको स्वत: संज्ञान रिट याचिका में बदल दिया गया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्थिति की गंभीरता और अदालत के समक्ष रखी गई सभी सामग्री को ध्यानपूर्वक देखते हुए हमने शोएब आलम से अनुरोध किया कि वह न्याय मित्र के रूप में अदालत की सहायता करें। उन्होंने कोर्ट के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

18 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने के साथ-साथ अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर में करेगी।

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Edited By: Sonu Gupta

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